उत्तर प्रदेश

गाजियाबाद में एक साथ लगाए जाएंगे 10 लाख पौधे, 12 जुलाई को वृक्षरोपण महायज्ञ

गाजियाबाद: सर्दियों के मौसम में गाजियाबाद का एयर क्वालिटी इंडेक्स अक्सर खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है. जिसके चलते बच्चों बुजुर्गों और साथ संबंधित बीमारियों से पीड़ित लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. बढ़ते प्रदूषण के बीच अब जिले में ग्रीन एरिया बढ़ाने की दिशा में बड़े स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं. वृक्षरोपण महायज्ञ 2026 के तहत गाजियाबाद को शासन स्तर से 10 लाख 22 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है.

जिला प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक प्रशासन और वन विभाग ने इस लक्ष्य को पार करते हुए 10 लाख 91 हजार पौधे लगाने की तैयारी की है. इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई है. वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 12 जुलाई को जिले के 1040 स्थान पर एक साथ पौधा रोपण अभियान चलाया जाएगा. जिसमें से 11 स्थल वन विभाग से संबंधित है जबकि शेष स्थल 27 अन्य विभागों के अधीन है.

सरकारी कार्यालय, विद्यालयों, ग्राम पंचायत, सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थलों पर बड़े पैमाने पर पौधे लगाए जाएंगे. अभियान में विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है. वन विभाग ने पौधारोपण के लिए अपनी नर्सरी से 51 प्रजातियों के पौधे उपलब्ध कराए हैं. इनमें फलदार, छायादार, औषधि और अधिक मात्रा में ऑक्सीजन देने वाले पौधे शामिल है. विभाग का उद्देश्य केवल पौधे ही लगाना नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ जैव विविधता को भी बढ़ावा देना है. नागरिक अपनी आवश्यकता और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पौधे लगाएंगे.

क्षेत्रीय वन अधिकारी इशा तिवारी के मुताबिक, इस साल विशेष अभियान के तहत पहला चरक वन की स्थापना होगी. वन विभाग मोदीनगर तहसील में एक हेक्टेयर भूमि पर चरक वन की स्थापना करेगा. चरक वन में करीब 1000 औषधीय पौधे लगाए जाएंगे. सभी पौधे औषधि प्रजातियों के होंगे ताकि भविष्य में यह क्षेत्र एक समर्पित औषधि वन के रूप में विकसित हो सके. इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी बल्कि औषधीय पौधों के संरक्षण और उनके महत्व के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ेगी.

जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने बताया, सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि पौधारोपण करने के बाद लगाए गए पौधों का विशेष ख्याल रखें. लगाए जाने वाले पौधों की नियमित सिंचाई और निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि उनके जीवित रहने की दर अधिक से अधिक रहे. समय पर खाद और पानी उपलब्ध कराने, मानसून के बाद भी उनकी देखभाल जारी रखने की योजना बनाने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं.

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