दिल्ली: लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है. बुधवार को मीडिया को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को कॉरपोरेट के हवाले कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि वह छात्रों के आंदोलन का पूरी तरह से समर्थन करते हैं.
राहुल गांधी ने कहा, “पिछले कुछ दिनों से देश के छात्र आंदोलन कर रहे हैं. वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं. कांग्रेस पार्टी उनका पूरी तरह से समर्थन करती है.” कांग्रेस नेता ने कहा कि 40 लाख रुपये लेकर या तो नौकरी दिए जा रहे हैं या फिर अपनों को परीक्षा में पास करवाया जा रहा है.
#WATCH | Delhi: Lok Sabha LoP and Congress MP Rahul Gandhi says, "It's not just that the system is rigged, it's that the system is unaffordable. This is a statistic that every youngster knows, but somehow the Government of India doesn't. One exam costs the families who take this… pic.twitter.com/ddWkwm0xGe
— ANI (@ANI) July 22, 2026
उन्होंने कहा, “हर एक स्टूडेंट जो महसूस कर रहा है और जो कर रहा है, हम उससे 100% सहमत हैं. और कुछ दिन पहले जो हुआ है, उसके कुछ नतीजे तो होने ही चाहिए. इसमें उनकी कोई गलती नहीं है.”
राहुल गांधी ने कहा, “मेरे साथ कैसा बर्ताव किया गया, यह मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता. मुझे इसकी परवाह नहीं है. मेरे साथ इससे भी पांच गुना बुरा बर्ताव किया जाए, तो भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. असल ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि छात्रों के साथ क्या हुआ है. ध्यान शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और उन बच्चों को जो कीमत चुकानी पड़ी है, उस पर होना चाहिए. इसलिए आप मेरे साथ जो चाहें करें. पांच बार, दस बार—मुझे कोई परवाह नहीं है. बल्कि, मुझे यह अच्छा लगता है क्योंकि मैं इससे सीखता हूं.” उन्होंने कहा, “मुझे सरकार के आरोपों की कोई परवाह नहीं है. सरकार के आरोपों का मुझ पर कोई असर नहीं पड़ता.”
राहुल गांधी ने कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था जो कभी दुनिया की सबसे बेहतर व्यवस्था हुआ करती थी, आज वह “रिग्ड” है. इसलिए हमें इस व्यवस्था को बदलने की जरूरत है. राहुल गांधी ने कहा ..
- शिक्षा व्यवस्था पर काम की जरूरत है.
- 7.5 करोड़ परिवारों पर इसका असर हो रहा है.
- पिछले 10 सालों में 152 पेपर लीक हुए हैं. औसतन एक महीने में एक पेपर लीक.
- इन सभी मामलों में आज तक किसी एक व्यक्ति को सजा नहीं हुई.
- पूरा सिस्टम अनअफोर्डेबल हो चुका है.
- छात्रों पर अत्याचार हुआ.
- सरकार टैक्स वसूलती है और उसके बाद शिक्षा पर बजट तैयार करती है.
- जितने छात्र एक साल में नीट परीक्षा देते हैं, एक आकलन है कि उनका परिवार 1.32 लाख करोड़ रुपये निजी तौर पर खर्च करता है. यह शिक्षा बजट के लगभग बराबर है. शिक्षा का बजट 1.40 लाख करोड़ है. अब आप समझिए कितने बड़े पैमाने पर खेल हो रहा है.
- धर्मेंद्र प्रधान एक अक्षम शिक्षा मंत्री हैं, उन्हें इस्तीफा देना चाहिए. यह छात्रों की मांग है और हम उनका समर्थन करते हैं.
- छात्रों को पैलेट गन से मारा जा रहा है, इसलिए हम चाहते हैं कि उन पर एक्शन हो.
- सरकार छात्रों से माफी मांगे.

