दिल्ली: 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यवस्था में व्यापक सुधार और संगठन को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया. अपने संबोधन में उन्होंने दो टूक कहा कि यदि दुनिया का भविष्य साझा है, तो उस भविष्य के निर्माण का अधिकार भी सभी देशों का समान रूप से होना चाहिए. प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की वकालत करते हुए इसे अब और टालने योग्य नहीं बताया.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स सदस्य देशों को अपनी आपसी एकता और सहमति को अब ठोस परिणामों में बदलने की दिशा में काम करना होगा. इसके लिए अगले 20 वर्षों का एक नया और आकांक्षी एजेंडा तैयार करने के साथ-साथ कार्यव्यवस्था में जरूरी बदलाव करने की आवश्यकता है. उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक संकटों का सबसे पहले सामना करने के बावजूद ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के देशों को नीतिगत निर्णयों में पीछे रखा जाता है. इस व्यवस्था को बदलने के लिए वैश्विक सुधारों के 10 प्रस्तावों पर मिलकर काम करने और अगले शिखर सम्मेलन तक एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने का आह्वान किया गया.
Sharing my opening remarks during the BRICS Session on ‘Inclusive Global Governance and Strengthening Multilateralism.’
https://t.co/g31TharSOc— Narendra Modi (@narendramodi) September 12, 2026
प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में विकासशील देशों को उनकी आर्थिक वास्तविकताओं के आधार पर उचित नेतृत्व और मतदान अधिकार दिए जाने की बात कही. इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर स्पेस और अंतरिक्ष जैसे भविष्य के क्षेत्रों में नियम बनाने की प्रक्रिया (Rule Making) में ग्लोबल साउथ की समान भागीदारी को जरूरी बताया. उन्होंने जोर दिया कि ग्लोबल साउथ को केवल ‘नियम मानने वाला’ (Rule Taker) नहीं बल्कि ‘नियम तय करने वाला’ (Rule Maker) बनाने के प्रयास होने चाहिए, और भारत इसके लिए नेतृत्व संभालने को पूरी तरह तैयार है.

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स किसी भी देश के विरोध का मंच नहीं है, बल्कि यह सभी को साथ लेकर चलने की सोच का जीवंत परिणाम है. उन्होंने सुझाव दिया कि इस साझेदारी को ठोस परिणामों तक पहुंचाने के लिए लिए गए निर्णयों और आपसी सहमति का नियमित फॉलो-अप होना चाहिए, जिसके लिए एक डिजिटल रिपॉजिटरी भी तैयार की जा सकती है.

