उत्तर प्रदेश: राम मंदिर में लगने वाला अष्टधातु का 6 फीट से ज्यादा ऊंचा और 2400 किलो वजनी घंटा उत्तर प्रदेश के जिला एटा के जलेसर को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाएगा. स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि इतना बड़ा घंटा अभी तक न बना है और न ही निकट भविष्य में बनेगा.
घुंघरु घंटी के लिए मशहूर नगरी एटा के जलेसर से फूलों से सजे रथ में 2400 किलो का घंटा बुधवार सुबह अयोध्या पधार गया है. अष्टधातु के इस घंटे को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दिया गया. इस घंटे की आवाज करीब 2 किमी तक सुनाई पड़ेगी.
इस घंटे का सांचा 75 कारीगरों ने 3 महीने में तैयार किया। 70 कारीगरों ने महज 25 मिनट में इस घंटे को ढालकर तैयार किया. जिसे बनाने में करीब 25 लाख का खर्च आया. इसके साथ ही 50-50 किलो के 7 अन्य घंटे भी ट्रस्ट को समर्पित किए गए. बताया जा रहा है कि जलेसर के घंटे पूरे विश्व में मशहूर हैं. घंटों के बजाने से ऊं की विशेष ध्वनि गूंजती है.
कारोबारी मनोज मित्तल ने बताया कि पिता विकास मित्तल की स्मृति में इस घंटे को तैयार किया गया है. 8 जनवरी को एटा से एक प्रतिनिधिमंडल जुलूस के साथ अयोध्या के लिए निकला था. पहले 2100 किलो का घंटा बनाने का लक्ष्य रखा गया था. फिर बाद में उत्साह और बढ़ा तो इसे 2400 किलो का बनवाया गया.
जलेसर के पीतल के घंटे पूरे विश्व में जाने जाते हैं. जहां चाहे 2000 किलो का घंटा हो या फिर 50 ग्राम की घंट इसे बजाने से ऊं की प्रतिध्वनि गूंजती है. घंटी के कारीगरों में छोटी घंटियों से लेकर बड़े-बड़े घंटों तक बनाने के लिए जलेसर ही जाना जाता है. इसी वजह से इसे एक जिला एक उत्पाद के रूप में भी योगी सरकार ने बढ़ावा दिया. जलेसर ही नहीं, अगर मुरादाबाद में भी पीतल पर कुछ काम करना हो तो जलेसर की मिट्टी को ही आयात किया जाता है.

