दिल्‍ली-एनसीआर

हाईराइज सोसाइटियों में सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला, आवारा कुत्ते के हमले पर AOA पर डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना

नोएडा: जिला उपभोक्ता आयोग ने हाईराइज सोसाइटियों में रहने वाले लाखों परिवारों की सुरक्षा से जुड़े एक अहम मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) निवासियों से रखरखाव (मेंटेनेंस) और सुरक्षा शुल्क वसूलती है, तो सोसाइटी परिसर में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उसकी कानूनी जिम्मेदारी है.

यह फैसला सेक्टर-82 स्थित केंद्रीय विहार-2 सोसाइटी में चार वर्षीय मासूम बच्ची पर आवारा कुत्ते के हमले के मामले में सुनाया गया. जिला उपभोक्ता आयोग ने घटना के लिए संबंधित AOA को जिम्मेदार ठहराते हुए पीड़ित परिवार को 1.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है.

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि सोसाइटी में रहने वाले लोगों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना AOA का दायित्व है. यदि सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के कारण किसी निवासी को शारीरिक या मानसिक नुकसान होता है, तो उसकी जवाबदेही से AOA बच नहीं सकती.

30 दिनों के भीतर देना होगा मुआवजा

आयोग ने AOA को निर्देश दिया है कि वह 30 दिनों के भीतर पीड़ित परिवार को 1.5 लाख रुपये का मुआवजा अदा करे। आयोग ने माना कि इस घटना से बच्ची को शारीरिक चोट पहुंचने के साथ-साथ पूरे परिवार को मानसिक पीड़ा, भय और असुरक्षा की भावना का सामना करना पड़ा.

NCR की हजारों सोसायटियों पर पड़ेगा असर

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल एक परिवार को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और पूरे एनसीआर की हजारों हाईराइज सोसाइटियों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है.

विशेषज्ञों के अनुसार अब यदि किसी सोसाइटी में सुरक्षा व्यवस्था, आवारा पशुओं के नियंत्रण, सामान्य क्षेत्रों की निगरानी या अन्य सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों में लापरवाही सामने आती है और उसके कारण किसी निवासी को नुकसान होता है, तो संबंधित AOA को उपभोक्ता आयोग के समक्ष जवाबदेह ठहराया जा सकता है.

सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बढ़ेगी जिम्मेदारी

इस फैसले के बाद माना जा रहा है कि विभिन्न सोसायटियों की AOA को सुरक्षा व्यवस्था, आवारा कुत्तों की रोकथाम, नियमित निगरानी, शिकायतों के त्वरित निस्तारण तथा स्थानीय प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय पर अधिक ध्यान देना होगा. इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है और सोसाइटी में रहने वाले परिवारों को अधिक सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा.

जिला उपभोक्ता आयोग का यह फैसला हाईराइज सोसाइटियों में रहने वाले लाखों निवासियों के अधिकारों और सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जो आने वाले समय में ऐसे मामलों की सुनवाई में एक प्रभावी कानूनी आधार बन सकता है.

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