दिल्‍ली-एनसीआर

दिल्ली के बुराड़ी में देश के सबसे बड़े ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का उद्घाटन

दिल्ली: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘सेवा संकल्प’ अभियान के तहत शनिवार को बुराड़ी में देश के सबसे बड़े और अत्याधुनिक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) का उद्घाटन किया. पांच लेन वाले इस आधुनिक केंद्र में सालाना एक लाख वाहनों की वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से फिटनेस जांच की जा सकेगी.

बुराड़ी स्थित इस नए एटीएस में 40,000 भारी मोटर वाहनों और 60,000 हल्के मोटर वाहनों की फिटनेस टेस्टिंग की क्षमता है. इस पूरी तरह स्वचालित (ऑटोमेटेड) प्रक्रिया के तहत वाहनों की ब्रेकिंग एफिशिएंसी, सस्पेंशन, हेडलाइट, साइड-स्लिप, एमिशन लेवल और अंडरबॉडी की सटीक जांच की जाएगी. इससे पहले 3 सितंबर को ओखला के तेखंड में भी करीब 72,000 वाहनों की वार्षिक क्षमता वाले एटीएस का शुभारंभ किया गया था. अब नंद नगरी, तेखंड और बुराड़ी को मिलाकर दिल्ली की कुल ऑटोमेटेड वाहन टेस्टिंग क्षमता सालाना ढाई लाख से अधिक हो गई है.

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि केवल सर्दियों के मौसम में अस्थायी उपाय करने से दिल्ली के प्रदूषण की समस्या का समाधान नहीं हो सकता. सरकार ने प्रदूषण के खिलाफ सालभर चलने वाली जंग छेड़ी है, जिसके तहत परिवहन, हरित आवरण का विस्तार, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और कचरा प्रबंधन पर एक साथ काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा कई कारकों से प्रभावित होती है, लेकिन सरकार शहर के स्तर पर ठोस कदम उठाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

1 अक्टूबर से पीयूसी (PUC) व्यवस्था होगी सख्त

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सेंटर्स की कार्यप्रणाली की भी तकनीक आधारित निगरानी की जाएगी. इसके साथ ही, वैध पीयूसी प्रमाणपत्रों से जुड़ा कड़ा एनफोर्समेंट सिस्टम आगामी 1 अक्टूबर से लागू कर दिया जाएगा. सरकार का मुख्य उद्देश्य केवल प्रदूषण पर चर्चा करना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और प्रभावी समाधान तलाशना है.

वहीं, परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि रिकॉर्ड एक साल में बनकर तैयार हुआ बुराड़ी एटीएस देश के चुनिंदा उच्च-क्षमता वाले केंद्रों में शामिल है. इससे कमर्शियल वाहन चालकों को अपने घर के नजदीक ही आधुनिक जांच की सुविधा मिलेगी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मार्गदर्शन में दिल्ली सरकार एक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम परिवहन व्यवस्था तैयार करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है.

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