नोएडा: यूपी के जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एयरोड्रम लाइसेंस मिल गया है. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने गौतम बुद्ध नगर जिले में जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) को लाइसेंस दे दिया है. यह लाइसेंस यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड को जारी किया गया है.
यह एयरपोर्ट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के साथ मिलकर बनाया जा रहा है. इसका कन्सेशन पीरियड 1 अक्टूबर 2021 से शुरू होकर 40 साल का है. एयरपोर्ट को पब्लिक यूज कैटेगरी में लाइसेंस मिला है, जो हर मौसम में काम कर सकता है. यहां 24 घंटे उड़ानें संचालित हो सकेंगी.
The Directorate General of Civil Aviation (DGCA) has granted the Aerodrome License to Yamuna International Airport Private Limited (YIAPL) for the Noida International Airport (NIA) at Jewar in Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh.
The airport has been licensed under the Public Use… pic.twitter.com/S67KHE0wR9
— ANI (@ANI) March 6, 2026
एयरपोर्ट में 10/28 ओरिएंटेशन वाला रनवे है, जिसकी लंबाई 3,900 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर है. इसमें इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम और एयरोनॉटिकल ग्राउंड लाइटिंग लगी हैं. यहां 24 कोड C और 2 कोड D/F एयरक्राफ्ट पार्क हो सकते हैं.
यह एयरपोर्ट चार चरणों में विकसित किया जा रहा है, जिसमें मल्टी-मॉडल कार्गो हब भी शामिल है. पहले चरण में एक रनवे और एक टर्मिनल के साथ सालाना करीब 12 मिलियन यात्रियों की क्षमता होगी. सभी चरण पूरे होने पर यह साल में सात करोड़ यात्रियों तक संभाल सकेगा.
दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए बड़ा एविएशन हब बनेगा. नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, पिछले दस साल में भारत में ऑपरेशनल एयरपोर्ट्स की संख्या 74 से बढ़कर 164 हो गई है. भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू एविएशन मार्केट बन चुका है.
नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने, पुराने ब्राउनफील्ड एयरपोर्ट्स को अपग्रेड करने और UDAN योजना के जरिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाई जा रही है. 2047 तक 400 से ज्यादा एयरपोर्ट्स का लक्ष्य है, जो कनेक्टिविटी, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेगा.
नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजरापु ने उत्तर प्रदेश सरकार को बधाई दी. उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी मजबूत करेगा.
यह विश्व स्तरीय एयरपोर्ट क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देगा. यहां स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का मिश्रण यात्रियों को बेहतरीन अनुभव देगा. इससे दिल्ली के मौजूदा एयरपोर्ट्स पर भीड़ कम होगी. यह विकास आजादी का अमृत महोत्सव के तहत महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत को मजबूत एविएशन इकोसिस्टम की ओर ले जा रहा है.

