दिल्ली: केंद्र सरकार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद को बढ़ता देख बड़ा एक्शन लिया है. सरकार ने केंद्रीय सीबीएसई के चेयरमैन और सचिव का ट्रांसफर कर दिया गया है. साथ ही केंद्र ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सेवाओं का ठेका देने के लिए सीबीएसई की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया की जांच के लिए समिति का गठन किया है.
बता दें कि, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के लिए सेवा की खरीद से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक सदस्य वाली कमेटी बनाई गई है.
- कमेटी की चेयरपर्सन एस. राधा चौहान, कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरपर्सन होंगी.
- कमेटी के चेयरपर्सन को जरूरत के हिसाब से दूसरे ऑफिस के अधिकारियों की मदद लेने का अधिकार है.
- कमेटी को सचिवीय सहायता कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन देगा.
- कमेटी एक महीने के अंदर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को अपनी रिपोर्ट देगी.
दूसरी तरफ शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि, भारत सरकार की साइबर सिक्योरिटी एजेंसियां, जैसे कि इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C), वगैरह, सीबीएसई OSM रीइवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक पर कड़ी नजर रख रही हैं. ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
A One-Member Committee has been constituted to inquire into matters relating to the procurement of services for the On-Screen Marking System by the Central Board of Secondary Education (CBSE).
(1) The Committee will be chaired by S. Radha Chauhan, Chairperson, Capacity Building… pic.twitter.com/JfN5VqYZ2f
— ANI (@ANI) June 2, 2026
बता दें कि, कांग्रेस की छात्र शाखा एनएसयूआई ने 12वीं कक्षा के लिए सीबीएसई की ‘ऑन- स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली में बड़े पैमाने पर हुईं कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच का अनुरोध करते हुए मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की.
ओएसएम उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की एक डिजिटल प्रणाली है, जिसमें छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके ऑनलाइन अपलोड किया जाता है और परीक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर उन्हें जांचकर अंक देते हैं.
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) की ओर से दायर जनहित याचिका में शिकायतकर्ता छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का ऑफलाइन पुनर्मूल्यांकन और भौतिक सत्यापन करने का अनुरोध किया गया है. कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ आठ जून को मामले की सुनवाई कर सकती है.

