गाँधी जी के दांडी मार्च के साक्षी नहीं, किंतु राहुल की भारत जोड़ो पदयात्रा के गवाह बने वर्तमान भारतवासी- अशोक गुप्ता - TV News Today
उत्तर प्रदेश

गाँधी जी के दांडी मार्च के साक्षी नहीं, किंतु राहुल की भारत जोड़ो पदयात्रा के गवाह बने वर्तमान भारतवासी- अशोक गुप्ता

सुशील कुमार शर्मा

उत्तर प्रदेश: मशहूर लेखक व विचारक डॉ. के. एस. भारद्वाज द्वारा लिखी गई व अद्विक पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पब्लिश पुस्तक “भारत जोड़ो पदयात्रा एक समीक्षा” का विमोचन आईटीओ चौक के समीप दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव के कार्यालय में भव्य कार्यक्रम कर किया गया. देवेंद्र यादव ने पुस्तक का विमोचन कर अपने सम्बोधन में कहा कि – नेता और जनता के सीधे संवाद की यात्रा है भारत जोड़ो यात्रा. उन्होने लेखक डॉ. के. एस. भरद्वाज एवं प्रकाशक अशोक गुप्ता को शानदार पुस्तक के लिए बधाइयाँ दी। इस अवसर पर पुस्तक के लेखक डॉ. के. एस. भारद्वाज ने कहा- अब तक की सबसे कठिन/लंबी पदयात्रा ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का लिखित इतिहास आवश्यक जान पड़ा, ताकि आने वाली पीढ़ी भी इससे प्रेरणा ले सके.

विमोचन के मौके पर अनिल भारद्वाज मिडिया इंचार्ज, मंगत राम सिंघल पूर्व मंत्री, हसन अहमद, डॉ. स्वाति चौधरी, ज़ोया खान, भीष्म शर्मा अश्वनी भारद्वाज पत्रकार, अली मेहंदी, अरविंद सिंह, डॉ. एस. पी. सिंह, जुबेर अहमद, करावल नगर जिलाध्यक्ष आदेश भारद्वाज के साथ कई अन्य महत्वपूर्ण लोग उपस्थित रहे. पुस्तक के लेखक डॉ. के. एस. भारद्वाज, देवेंद्र यादव, अनिल भारद्वाज, मंगतराम सिंघल और आदेश भारद्वाज ने पुस्तक और भारत जोड़ो यात्रा पर अपने- अपने विचार रखते हुए कहा कि अलग -अलग लोगों ने भारत जोड़ो यात्रा पर अपनी- अपनी राय रखी, यात्रा की समीक्षाएँ की. लेकिन यात्रा को लेकर अपने विचारों को पुस्तक के रूप में संजोकर पेश करना अपने आप में एक बेहतरीन मिसाल है. किसी भी अवसर को लेकर हमारे सबके अलग विचार होते हैं लेकिन एक लेखक के रूप में इस यात्रा के सकारात्मक पहलु, नकारात्मक पहलुओं के अलावा इसका सामाजिक और सामयिक महत्व समझना बहुत बड़ी बात है.

देवेंद्र यादव ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह पुस्तक राहुल गांधी के उन प्रयासों का दस्तावेज है जो इस यात्रा के माध्यम से राहुल गांधी ने सत्ताधारी लोगों के सामने पेश किए. भारतीय राजनीति के पुनर्जागरण में जुटे राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से ना सिर्फ सांप्रदायिकता को चुनौती दी बल्कि इस लोकतंत्र को घृणा, नफरत और तानाशाही से बचाने के सत्याग्रह का आगाज भी किया. यह पुस्तक उन मिथकों पर भी करारी चोट करती है जो दुष्प्रचार राहुल गांधी के खिलाफ किए गए. कैसे अकेले पड़ते जा रहे नागरिकों से यात्रा के दौरान राहुल गांधी मिलते रहे, उनके दुखों, उनकी परेशानियों, उनके अनुभवों को आत्मसात करते रहे। डॉ. के. एस. भारद्वाज द्वारा लिखी यह पुस्तक सही मायने में हमें यह बताती है कि एक नेता और जनता के सीधे संवाद की महत्वता को इस तरह की यात्रा से ही रेखांकित किया जा सकता था. अद्विक पब्लिकेशन की ओर से डॉ. स्वाति चौधरी और ज़ोया खान ने मुख्य अतिथि देवेंद्र यादव एवं लेखक को स्मृति-चिह्न भेंट किया.

इस पुस्तक के लिखे जाने तक या भारत जोड़ो यात्रा के दोनों चरण समाप्त हो जाने से यह यात्रा रुकी नहीं है. स्टेशन के कुलियों से मिलना, धान लगाते हुए किसानों के साथ उनके खेत में धान लगाना, कीर्तिनगर के बढ़ईयों से मिलना, रामेश्वर सब्जी वाले से मिलना, रामचेत मोची से मिलना या सुनील टैक्सी वाले से मिलना इस यात्रा के लघु रूप हैं जो अनवरत चलते रहेंगे और मुझे उम्मीद है कि डॉक्टर के. एस. भारद्वाज की पुस्तकें भी अपनी समीक्षाएं लेकर आती रहेंगी.

चिराग देखें मेरे मचल रही है हवा/कई दिनों से बहुत तेज़ चल रही है हवा/ बना और रहे थे किससे मेरी तबाही के/उन्हें ख़बर ही नहीं कि अब रुख़ बदल रही है हवा

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