अयोध्या राम मंदिर में रामायण के हर किरदार के होंगे दर्शन, राम दरबार सहित 14 मंदिरों में एक साथ होगी प्राण प्रतिष्ठा - TV News Today
उत्तर प्रदेश

अयोध्या राम मंदिर में रामायण के हर किरदार के होंगे दर्शन, राम दरबार सहित 14 मंदिरों में एक साथ होगी प्राण प्रतिष्ठा

उत्तर प्रदेश: राम मंदिर में रामायण के हर किरदार के दर्शन होंगे. इसके लिए 70 एकड़ के परिसर मे राम मंदिर के साथ 13 अन्य मंदिरों का निर्माण किया गया है. इसके अलावा मंदिर के लोवर प्लीथ पर रामायण के प्रसंगों पर आधारित म्यूरल भी दर्शाया जा रहा है.

5 जून से इन मंदिरों में स्थापित मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होगी, लेकिन इन मंदिरों में दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं को 3 से 4 माह तक और इंतजार करना पड़ेगा. राम जन्मभूमि परिसर में परकोटे के निर्माण का कार्य चल रहा है. बची भूमि पर लैंडस्केपिंग किया जा रहा है. जिसे सितम्बर माह तक पूरा होने की उम्मीद है.

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के व्यवस्था प्रभारी गोपाल जी राव ने बताया, 5 जून को सभी मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होने के बाद पूजन अर्चन कार्यक्रम शुरू हो जाएगा. उन्होंने बताया कि परकोटा कॉरिडोर का निर्माण पूरा नहीं हुआ है. इसको पूरा करने में अभी 3 माह से अधिक का समय और लगेगा. सभी मंदिरों तक भक्तों के पहुंचने के लिए मार्ग को व्यवस्थित होने में समय लग रहा है.

कई स्थानों पर निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके कारण श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं हो पाएगा. प्रतिष्ठा उत्सव का मुहूर्त बहुत ही खास माना जा रहा है. इसके बाद कोई मुहूर्त नहीं मिल रहा है. इसलिए प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न कर लिया जाएगा और फिर आगे एक निश्चित तिथि पर श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था प्रारंभ की जाएगी.

राम जन्मभूमि परिसर में 14 प्रतिमाओं के प्राण प्रतिष्ठा में राम मंदिर के प्रथम तल पर राम दरबार, परकोटा के अग्नि कोण पर गणपति, दक्षिणी भुजा के मध्य मंदिर में हनुमान जी, नैऋत्य कोण मंदिर में सूर्य भगवान, वायव्य कोण मंदिर में भगवती और उत्तरी भुजा के मध्य मंदिर में अन्नपूर्णा माता और ईशान कोण पर शिव मंदिर में शिवलिंग की प्रतिष्ठा होगी.

इसके अलावा परिसर में महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषाद राज, माता शबरी एवं देवी अहिल्या की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा होगी. इसके साथ ही मंदिर के लोअर प्लीथ पर लग रहे रामायण के प्रसंग का भी दर्शन प्रारंभ होगा.

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