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Cyclone Mocha: साल का पहला साइक्लोन आ रहा है, नाम है 'मोचा', ये राज्य-कई देश जद में आएंगे, IMD ने चेतावनी जारी की - TV News Today
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Cyclone Mocha: साल का पहला साइक्लोन आ रहा है, नाम है ‘मोचा’, ये राज्य-कई देश जद में आएंगे, IMD ने चेतावनी जारी की

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चक्रवाती तूफान मोचा (Cyclone Mocha Odisha Update) को लेकर भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने नया अपडेट दिया है. IMD के अनुसार, कल यानि 6 मई के आसपास दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी (SouthEast bay of bengal) के ऊपर एक चक्रवात बनेगा और इसके चलते अगले 48 घंटों में कम वायु दबाव का क्षेत्र बन जाने की संभावना है. साल 2023 के पहले चक्रवाती तूफान के मई महीने में आने की आशंका जताई गई है. IMD महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने कहा, ‘कुछ प्रणालियों ने इसके एक चक्रवात होने का पूर्वानुमान जताया है. हम नजर रख रहे हैं. नियमित रूप से अपडेट उपलब्ध कराया जाएगा.’ पूर्वानुमान मिलने के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने अधिकारियों से किसी भी घटना के लिए तैयार रहने को कहा है.

तूफान को ‘मोचा’ नाम क्यों दिया गया | Why the Cyclone was named Mocha
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और एशिया और प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) के सदस्य देशों की ओर से अपनाई जाने वाली नामकरण प्रणाली के तहत चक्रवात को ‘मोचा’ (Mocha) नाम दिया गया है. मोचा यमन के लाल सागर तट पर एक बंदरगाह शहर है और इसी के नाम पर इस चक्रवात के नाम का सुझाव दिया. मोखा (अरबी: المُخا, रोमानीकृत: अल-मुखा), जिसे मोचा या मुख भी कहा जाता है, यमन के लाल सागर तट पर एक बंदरगाह शहर है. मोखा यमन की राजधानी सना का प्रमुख बंदरगाह था. लंबे समय से अपने कॉफी व्यापार के लिए जाना जाता है, शहर ने मोचा कॉफी को अपना नाम दिया.

बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बनने की आईएमडी की भविष्यवाणी के साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मंगलवार को संबंधित अधिकारियों से राज्य में किसी भी संभावित ग्रीष्मकालीन चक्रवात से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा. आईएमडी की भविष्यवाणी के मद्देनजर पटनायक ने संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चक्रवात तैयारी समीक्षा बैठक की, जिसमें कहा गया कि 6 मई के आसपास बंगाल की दक्षिण-पूर्व खाड़ी के ऊपर वायुमंडल में दबाव बनने के कारण चक्रवाती तूफान आने की संभावना है. यह बाद के 48 घंटों के दौरान कम दबाव वाले क्षेत्र में चला जाएगा.

मुख्यमंत्री ने स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए. मई 2019 में ओडिशा में तबाही मचाने वाले चक्रवाती तूफान फानी की याद दिलाते हुए उन्होंने अधिकारियों से संभावित ग्रीष्मकालीन चक्रवात का मुकाबला करने के लिए सभी तैयारियां पहले से करने को कहा.

पटनायक ने कहा कि मई 2019 में फानी चक्रवात ने राज्य में काफी नुकसान पहुंचाया था. हर जीवन को अनमोल बताते हुए मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहने की सलाह दी. ओडिशा सरकार के विभिन्न विभागों, एनडीआरएफ, ओडीआरएएफ और अग्निशमन सेवा को पहले से तैयार रहने और तट के पास और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को चक्रवात आश्रयों में निकालने की योजना के साथ तैयार रहने को कहा गया है.

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी सलाह दी है कि यदि आवश्यक हो तो बचाव, पुनर्वास और राहत कार्यो को करने के लिए अग्रिम रूप से आवश्यक दवाएं और उपकरण स्टॉक करें और योजना तैयार करें.

पटनायक ने मुख्य सचिव प्रदीप कुमार जेना से नियमित रूप से स्थिति की समीक्षा करने को कहा, जबकि विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) सत्यव्रत साहू को स्थिति पर कड़ी नजर रखने और सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय से काम करने का निर्देश दिया गया है.

जेना ने कहा कि सभी विभागों और कलेक्टरों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया गया है. करीब 1000 साइक्लोन शेल्टर तैयार रखे गए हैं. इसके अलावा, स्कूलों और अन्य आश्रयों की भी पहचान की गई है.

बैठक के बाद मीडियाकर्मियों से बात करते हुए एसआरसी साहू ने कहा कि गर्मी के चक्रवात हमेशा अप्रत्याशित होते हैं. हालांकि, घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी उपाय किए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा, “2019 में फानी, 2020 में अम्फान और 2021 में यास सहित अतीत में बंगाल की खाड़ी में कई चक्रवात बन चुके हैं. पहले से ही ओडिशा में राज्यस्तरीय और जिलास्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं और स्थिति को बारीकी से देखा जा रहा है. आईएमडी द्वारा अब तक कोई चक्रवात पूवार्नुमान जारी नहीं किया गया है, भले ही निगरानी की गई हो.”

साहू ने कहा कि जिला और राज्य स्तर पर चौबीस घंटे नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं. उन्होंने कहा कि कलेक्टरों को प्रत्येक पंचायत के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने और गांव-वार निकासी योजना तैयार करने के लिए कहा गया है.

एसआरसी ने बताया कि संभावित चक्रवात के लिए एनडीआरएफ की 17 और ओडीआरएएफ की 20 टीमों को तैयार रखा गया है.

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