उत्तराखंड

उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण, सरकार को बुद्धिजीवियों की तलाश, मिलेगी एक समान शिक्षा

उत्तराखंड: मदरसा बोर्ड समाप्त होने जा रहा है. ऐसे में अब प्रदेश में मदरसा संचालित करने के लिए संचालकों को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी. साथ ही उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से भी संबद्धता (Affiliation) लेना अनिवार्य होगा. अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक- 2025 को राजभवन से मंजूरी मिलने के बाद अब राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को लेकर अल्पसंख्यक बुद्धिजीवियों की तलाश शुरू कर दी है. ताकि जल्द से जल्द प्राधिकरण का गठन किया जा सके, क्योंकि आगामी शैक्षिक सत्र से ये व्यवस्था लागू हो जाएगी.

उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी समुदाय से सदस्य होंगे, जोकि एक साथ मिलकर अल्पसंख्यक बच्चों के लिए पाठ्यक्रम तैयार करेंगे. दरअसल, धामी मंत्रिमंडल ने 17 अगस्त 2025 को अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक- 2025 को मंजूरी दी थी. इसके बाद गैरसैंण में हुए विधानसभा मॉनसून सत्र में इसे पारित किया था. इसके बाद फिर लोक भवन की मंजूरी के लिए राजभवन भेजा गया था. जिसके बाद, लोक भवन ने 6 अक्टूबर 2025 को इस विधेयक को मंजूरी दे दी थी. ये विधेयक मदरसा बोर्ड को समाप्त करते हुए अल्पसंख्यक संस्थानों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ने का है.

राज्यपाल ने अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक-2025 को मंजूरी देने से पहले राज्य के अल्पसंख्यक प्रतिनिधिमंडलों के साथ व्यापक चर्चा की थी. जिनमें सिख, मुस्लिम, जैन, ईसाई, बौद्ध धर्म के लोग शामिल थे. ऐसे में लोक भवन से विधेयक की मंजूरी मिलने में बाद इस विधेयक के तहत अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया जाना है, जो अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता प्रदान करने का काम करेगा. साथ ही, विधेयक में ये भी प्रावधान किया गया है कि मदरसे जैसे अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों को अब उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से एफिलेशन लेनी होगी. ऐसे में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग आगे की कारवाई करने में जुट गया है.

वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि उत्तराखंड में सभी अल्पसंख्यक बच्चों को आगामी शैक्षिक सत्र यानी जुलाई 2026 से एक समान शिक्षा मिलेगी. साथ ही, उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अंतर्गत मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन के सभी शिक्षण संस्थाएं आएंगी. जिसके गठन की प्रक्रिया चल रही है. साथ ही कहा कि, देवभूमि में तुष्टिकरण की शैक्षिक नीति का अंत होने जा रहा है. अल्पसंख्यक समुदाय के सभी बच्चे, चाहे वो किसी भी समुदाय से होंगे, वो राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़ेंगे.

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