उत्तराखंड: तीन दिन तक बारिश और अवरुद्ध पैदल मार्ग ने बाबा केदार की राह रोक रखी थी. हजारों श्रद्धालु सोनप्रयाग में ठिठके हुए थे. हर नजर यात्रा शुरू होने की राह देख रही थी. मंगलवार को चौथे दिन जैसे ही केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर आवाजाही शुरू हुई. इस दौरान सोनप्रयाग में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. देखते ही देखते पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं की भीड़ से भर गया. बाबा केदार के जयकारों से गूंज उठा.
कंधों पर सामान, जुबां पर ‘बम-बम भोले’ और आंखों में बाबा केदार के दर्शन की आस लिए हजारों श्रद्धालु धाम की ओर निकल पड़े. तीन दिन से जमा भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने यात्रियों को एक साथ आगे बढ़ाने के बजाय जत्थों में और चरणबद्ध तरीके से रवाना किया. इसके बावजूद सोनप्रयाग में श्रद्धालुओं की भीड़ का दबाव साफ दिखाई दिया. जगह-जगह लंबी कतारें लगी रहीं. तीन दिन से थमी यात्रा के बाद रास्ता खुलते ही सोनप्रयाग से केदारनाथ तक फिर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष सुनाई देने लगे. बारिश और दुश्वारियों के बीच भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ. राह मुश्किल थी, लेकिन बाबा केदार के दर्शन की आस लिए श्रद्धालुओं के कदम लगातार आगे बढ़ते रहे.
🚶♂️ केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा सुचारु ढंग से संचालित हो रही है। 🛕
श्रद्धालुगण सुरक्षित एवं व्यवस्थित रूप से बाबा केदार के दर्शन हेतु आगे बढ़ रहे हैं।
रुद्रप्रयाग पुलिस — आपकी सुरक्षा, हमारी जिम्मेदारी। 👮♂️🛡️ pic.twitter.com/ZHhSmgpjQZ
— Rudraprayag Police Uttarakhand (@RudraprayagPol) September 29, 2026
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया केदारनाथ पैदल मार्ग अभी भी खतरनाक बना हुआ है. ऐसे में यात्रियों की आवाजाही को लेकर सतर्कता बरती जा रही है. प्रशासन की निगरानी में श्रद्धालुओं को आगे भेजा जा रहा है, ताकि जोखिम को कम किया जा सके.
📅 दिनांक 29 सितम्बर 2026 | 🕥 समय 13:00 बजे
🚩 केदारनाथ धाम यात्रा अपडेट 🚩
🙏 जनपद रुद्रप्रयाग में श्री केदारनाथ धाम की यात्रा सुचारु ढंग से संचालित हो रही है।
🌄 आज प्रातः गौरीकुण्ड से यात्रा पर निकले श्रद्धालुगण लिंचोली क्षेत्र में पहुंच चुके हैं।
☀️ पैदल मार्ग सहित श्री… pic.twitter.com/jUflAuCJql
— Rudraprayag Police Uttarakhand (@RudraprayagPol) September 29, 2026
उधर, पैदल यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की आवाजाही को अनुमति नहीं मिलने से गौरीकुंड में संचालकों का आक्रोश सामने आया. श्रद्धालुओं के लिए पैदल यात्रा शुरू होने के बावजूद घोड़े-खच्चरों को आगे जाने की अनुमति नहीं मिलने पर संचालक नाराज हैं. उनका कहना है कि इससे उनके सामने रोजी-रोटी और संचालन को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है.तीन दिन की बंदी के बाद खुली राह ने जहां श्रद्धालुओं के चेहरों पर खुशी लौटा दी, वहीं खतरनाक बने पैदल मार्ग और बढ़ती भीड़ ने प्रशासन के सामने सुरक्षा की चुनौती भी खड़ी कर दी है.

