काशी के विद्वान कराएंगे प्रभु रामलाल के दरबार संग विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा, देश भर से 101 आचार्य होंगे शामिल - TV News Today
उत्तर प्रदेश

काशी के विद्वान कराएंगे प्रभु रामलाल के दरबार संग विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा, देश भर से 101 आचार्य होंगे शामिल

उत्तर प्रदेश: अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि परिसर में प्रभु श्री राम के दरबार के साथ-साथ देवालयों में विग्रह स्थापना के लिए तीन दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत 3 जून से हो रही है. इस महां अनुष्ठान का नेतृत्व काशी के विद्वान करेंगे. काशी के आचार्य पंडित जयप्रकाश त्रिपाठी के आचार्यत्व में 12 वेदपाठी रामनगरी जाएंगे. साथ ही इसमें देश के विभिन्न प्रांतो से 101 अन्य आचार्य भी शामिल होंगे.

बता दें कि प्रभु श्री राम के धाम में उनके दरबार के संग साथ मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. अनुष्ठान की जिम्मेदारी काशी के आचार्य पंडित जयप्रकाश त्रिपाठी को दी गई है. यह रामलाल के प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य आचार्य पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित के शिष्य है.

पंडित जयप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि भगवान की कृपा से मुझे उनकी सेवा करने का अवसर मिला है. गुरुदेव के आशीर्वाद से हम भगवत कार्य करने जा रहे हैं और उन्हीं की कृपा से मैं पात्र हो चुका हूं कि मैं प्रभु के दरबार में प्राण प्रतिष्ठा करा सकूं. यह सब प्रभु की लीला है और यह मेरा सौभाग्य है.

उन्होंने कहा कि 3 जून से तीन दिवसीय अनुष्ठान का कार्यक्रम प्रभु श्री राम के दरबार में शुरू हो रहा है. इस बार अनुष्ठान में काशी से 11 यजुर्वेद के विद्वान और दो ऋग्वेद की विद्वान शामिल होंगे. जिसमें बीएचयू ज्योतिष विभाग के भी दो विद्वान है. उन्होंने बताया कि काशी के विद्वान 1 जून को ही अयोध्या पहुंच जाएंगे. जहां 2 जून को कलश यात्रा के साथ अनुष्ठान की तैयारी होगी और उसके बाद 3 जून से विग्रहों के प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम शुरू होगा. इन विग्रह में प्रभु श्री राम के दरबार के साथ गणेश जी, सूर्य नारायण, मां अन्नपूर्णा, मां भगवती, मां शीर्षवतार, व शिव जी का विग्रह है जिसे प्रतिष्ठित किया जाएगा.

वहीं विशिष्ट अनुष्ठानों की बात करें तो, पहले दिन 3 जून को मंडप में देवी देवताओं का आह्वान होगा. दूसरे दिन चार को आह्वानित देवताओं का पूजन, अन्नाधिवास, देव स्नपन,प्रसाद स्नपन , मूर्ति भ्रमण, शैय्याधिवास इत्यादि अनुष्ठान होंगे और 5 जून को देवताओं का पूजन मूर्तियों को मंदिर में स्थापित कर महा पूजा, महा आरती संपन्न कराई जाएगी.

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