रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महाराष्ट्र के संभाजीनगर में महाराणा प्रताप की प्रतीमा का अनावरण किया - TV News Today
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महाराष्ट्र के संभाजीनगर में महाराणा प्रताप की प्रतीमा का अनावरण किया

महाराष्ट्र: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कनॉट इलाके में किया महाराणा प्रताप की घुड़सवार प्रतिमा का अनावरण किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पालकमंत्री संजय शिरसाट, विपक्ष के नेता अंबादास दानवे समेत सांसद और विधायक मौजूद थे.

इस दौरान रक्षा मंत्री ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि औरंगजेब ने लोगों पर बहुत अन्याय और अत्याचार किया. उसने उनका धर्म परिवर्तन करने की कोशिश की. लेकिन अभी भी कुछ लोग उसे नायक मानते हैं.

राजनाथ सिंह ने कहा, ‘इन लोगों को पंडित नेहरू की किताब पढ़नी चाहिए, ताकि उन्हें पता चले कि औरंगजेब कितना क्रूर राजा था.’ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महाराणा प्रताप के कार्यों को नमन करते हुए कहा, ‘महाराणा प्रताप इतिहास के अद्वितीय योद्धा थे जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया. छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि पर उनकी प्रतिमा का अनावरण करते हुए मुझे गर्व हो रहा है.’

छत्रपति संभाजीनगर स्थित कॉनॉट गार्डन में शुक्रवार को महाराणा प्रताप की 16 फुट ऊंची घुड़सवार प्रतिमा का अनावरण किया गया. छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप के कार्यों में समानताओं का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, ‘इन महापुरुषों ने न केवल बहादुरी से लड़ाई लड़ी, बल्कि समाज को एक साथ लाया और राष्ट्रीय हित के लिए काम किया. उनकी सेना में समाज के सभी वर्ग शामिल थे.’

राजनाथ सिंह ने कहा, ‘इसमें आदिवासी, मुस्लिम, अन्य समुदायों का प्रतिनिधित्व था. यही कारण है कि ये नेता न केवल युद्ध नायक थे, बल्कि एकता के प्रतीक भी थे.’ उन्होंने आलोचना करते हुए कहा कि हमें इतिहास के नाम पर आधा सच पढ़ाया गया. उन्होंने कहा, ‘हमें महाराणा प्रताप और शिवाजी महाराज का पूरा और सच्चा इतिहास नहीं पढ़ाया गया.

आजादी के बाद इन राजाओं का गलत इतिहास पेश करने की कोशिश की गई. औरंगजेब जैसे अत्याचारी राजा को महिमामंडित करने की कोशिश की गई. कुछ लोग आज भी उसे नायक के रूप में पेश कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है. तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की लिखी किताब पढ़िए, बहुत सी बातें अलग हैं. धर्म परिवर्तन कराने वाला, हिंदू संस्थाओं को नष्ट करने वाला, सनातन का विरोध करने वाला राजा कैसे नायक हो सकता है? ऐसा कहा गया है.

हमने सिर्फ औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर किया है. इसमें कुछ भी गलत नहीं है.’ हमारी सनातन संस्कृति को समावेशी बताते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, ‘हमने कभी जाति की राजनीति नहीं की. हमारे नायक किसी एक धर्म से ताल्लुक नहीं रखते थे.

हमने शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप से सीखा है कि सबको साथ लेकर चलना चाहिए. ऐसे महापुरुषों द्वारा दी गई प्रेरणा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी असली जिम्मेदारी है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ‘वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सिंह की घुड़सवार प्रतिमा छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम द्वारा स्थापित की गई थी.

मुझे खुशी है कि भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसका अनावरण किया. छत्रपति संभाजीनगर शहर में एक तरफ छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा है और दूसरी तरफ वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सिंह की प्रतिमा है. इसलिए यहां प्रेरणा की कोई कमी नहीं होगी.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा आगे कहा कि महाराणा प्रताप एक राष्ट्रवादी और देशभक्त थे. उन्होंने अंत तक देश के लिए संघर्ष किया. महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रपति संभाजी महाराज ने स्वराज्य के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया, लेकिन कभी मुगलों का शासन स्वीकार नहीं किया.

आज हम इन वीरों की वजह से ही सही मायने में आजादी का आनंद ले रहे हैं. यहां महाराणा प्रताप की प्रतिमा सिर्फ एक प्रतिमा नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत को विकसित भारत बनाने का संकल्प इसी माध्यम से किया जा रहा है.

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