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कैलाश मानसरोवर भवन से देश भर के तीर्थ यात्रियों का तीसरा जत्था रवाना, 15 जून से यात्रा की हुई शुरूआत

दिल्ली: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर देश भर के यात्री ग़ाज़ियाबाद के कैलाश मानसरोवर भवन से रवाना हो रहे हैं. 15 जून 2025 को तीर्थ यात्रियों का पहला जत्था कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए रवाना हुआ था. पहले जत्थे के लिए कुल 46 तीर्थ यात्रियों का पंजीकरण हुआ था. स्वास्थ्य कारणों से कुछ तीर्थ यात्री शामिल न हो सके. पहले जत्थे में दो लायजनिंग ऑफ़िसर समेत कुल 39 लोग इस यात्रा के लिए रवाना हुए थे. उत्तर प्रदेश सरकार में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. 11 जून 2025 से कैलाश मानसरोवर भवन में तीर्थ यात्रियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था.

तीर्थयात्रियों का दूसरा जत्था 20 जून 2025 को रवाना हुआ था. जिसमें कुल 40 तीर्थ यात्री शामिल थे. 27 जून 2025 को तीर्थ यात्रियों को तीसरा जत्था रवाना हुआ जिसमें 44 तीर्थयात्री शामिल हैं.

कैलाश मानसरोवर भवन के प्रबंधक दिनेश गर्ग के मुताबिक़ कुल 15 जत्थे कैलाश मानसरोवर यात्रा पर रवाना होने है. प्रत्येक जत्थे में 50 लोग शामिल हैं. कई यात्रियों को स्वास्थ्य जांच के बाद जाने की अनुमति नहीं मिलती है तो ऐसे में जत्थे की संख्या कम भी हो सकती है. कैलाश मानसरोवर भवन में तीर्थ यात्रियों के आने का सिलसिला जारी है. प्रत्येक तीर्थयात्री का परिवार के सदस्यों की तरह हम लोग ख्याल रख रहे हैं.

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने के लिए भारत से दो मार्ग हैं पहला मार्ग उत्तराखंड से और दूसरा मार्ग सिक्किम से हैं. पहला रूट उत्तराखंड में लिपुलेख और सिक्किम के नाथुला पास से होकर दूसरा रूट गुजरता है. कैलाश मानसरोवर होटल के प्रबंधक दिनेश गर्ग के मुताबिक़ मौजूदा समय में तीर्थ यात्री सिक्किम के नाथुला पास के रूप से होकर तीर्थ यात्रा पर जा रहे हैं. 30 जून दूसरे रूप से होकर जाने वाला ग्रुप मानसरोवर भवन पहुंचेगा जोकि को उत्तराखंड के लिपुलेख रूट से होकर जाएगा.

आखिरी बार कैलाश मानसरोवर यात्रा साल 2019 में हुई थी. साल 2020 में कोरोना महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था. उसके बाद भारत-चीन के बीच गलवान वैली को लेकर उपजे विवाद के चलते यात्रा शुरू ही नहीं हो सकी. अब भारत और चीन के बीच बनी सहमति के बाद यात्रा फिर शुरू हो रही है. इस यात्रा के लिए वीजा अनिवार्य है क्योंकि ये क्षेत्र चीन के कब्जे वाले तिब्बत में पड़ता है. इसलिए इस यात्रा के लिए चीन सरकार की मंजूरी जरूरी होती है.

कैलाश मानसरोवर को भगवान शिव का घर कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ही भगवान शिव माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं. भगवान शिव का निवास माने जाने के कारण हिंदू धर्म में इसका खासा महत्व है. साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा को मोक्ष और आध्यात्मिक मुक्ति का प्रतीक भी माना जाता है. इसके साथ ही कैलाश पर्वत को ब्रह्मांड का केंद्र भी कहा जाता है.

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