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साधना और तपस्या के भाव से छात्रों को पढ़ाया: आचार्य सुनील जैन

दिल्ली: गांधीनगर स्थित डीएवी विद्यालय, नेहरू गली में शुक्रवार को वरिष्ठ गणित अध्यापक आचार्य सुनील जैन की सेवानिवृत्ति समारोह एवं महान शिक्षाविद, साहित्यकार और नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव Rabindranath Tagore की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई. कार्यक्रम में शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं विद्यालय प्रबंधन ने भावुक माहौल के बीच आचार्य सुनील जैन को सम्मानपूर्वक विदाई दी.

समारोह के दौरान मंच पर विद्यालय अध्यक्ष नरेश शर्मा, प्रबंधक गिरिजेश रस्तोगी, प्रधानाचार्य लखी राम, आचार्य दिनेश चंद शर्मा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिल्ली प्रांत के सह बौद्धिक प्रमुख सतीश शर्मा उपस्थित रहे. सभी अतिथियों ने पुष्पमाला पहनाकर आचार्य सुनील जैन का स्वागत एवं सम्मान किया.

विद्यालय अध्यक्ष नरेश शर्मा और प्रबंधक गिरिजेश रस्तोगी ने अपने संबोधन में आचार्य सुनील जैन के 32 वर्षों के शिक्षण जीवन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने विद्यार्थियों को केवल गणित ही नहीं पढ़ाया, बल्कि शिक्षा को साधना और तपस्या मानते हुए हजारों छात्रों का भविष्य संवारने का कार्य किया. उन्होंने कहा कि सुनील जैन की मेहनत, अनुशासन और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण हमेशा प्रेरणादायी रहेगा.

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिल्ली प्रांत के सह बौद्धिक प्रमुख सतीश शर्मा ने गुरुदेव Rabindranath Tagore के जीवन पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि वर्ष 1913 में उन्हें उनकी प्रसिद्ध कृति Gitanjali के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था और वे एशिया के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता बने. उन्होंने यह भी बताया कि महात्मा Mahatma Gandhi ने उन्हें ‘गुरुदेव’ की उपाधि दी थी.

अपने विदाई संबोधन में आचार्य सुनील जैन भावुक नजर आए. उन्होंने अपने 32 वर्षों के अध्यापन अनुभव साझा करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाना उनके लिए नौकरी नहीं, बल्कि एक साधना और तपस्या रही है. उन्होंने कहा कि छात्रों की सफलता ही उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है.

अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य लखी राम ने आचार्य सुनील जैन सहित मंचासीन अतिथियों का आभार व्यक्त किया. कार्यक्रम का सफल संचालन आचार्य आशुतोष और बलविंदर कौर ने किया. समारोह का समापन भावनात्मक माहौल और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच हुआ.

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