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कृत्रिम वर्षा का दूसरा ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा, दिल्ली को प्रदूषण से मिलेगी राहत की उम्मीद

दिल्ली: जानलेवा प्रदूषण से निजात दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) का दूसरा ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि मंगलवार को आईआईटी-कानपुर के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में विशेष विमान से कानपुर, मेरठ होते हुए दिल्ली के ऊपर बुराड़ी, करोल बाग, मयूर विहार इलाके में क्लाउड सीडिंग की गई.

कानपुर के विशेषज्ञों के नेतृत्व में यह दूसरा परीक्षण किया गया. कानपुर से उड़ान भरने वाले एक विशेष विमान ने दिल्ली के ऊपर, विशेष रूप से बुराड़ी और उसके आस-पास के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में, क्लाउड सीडिंग की प्रक्रिया को अंजाम दिया. ट्रायल उड़ान के दौरान, विमान से सिल्वर आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड जैसे रासायनिक यौगिकों को बादलों में छोड़ा गया. ये कण वर्षा की बूंदों के निर्माण के लिए संघनन केंद्र (कंडेंसेशन न्यूक्लीआई) के रूप में कार्य करते हैं.

उन्होंने बताया कि आज बादलों में नमी 15 से 20 फीसदी के करीब थी. वैज्ञानिकों ने बताया कि रासायनिक प्रक्रिया पूरी होने में डेढ़ घंटे से चार घंटे तक का समय लग सकता है. दिल्ली के इन इलाकों में अगर बारिश होती है तो वह कृत्रिम बारिश होगी. चूंकि बादलों में नमी कम थी, इस वजह से अधिक बारिश नहीं होगी.

पर्यावरण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह दूसरा ट्रायल मिशन मुख्य रूप से परियोजना की तकनीकी तैयारी का आकलन करने के लिए था. इसमें विमान की कार्यक्षमता, सीडिंग उपकरणों और ‘फ्लेयर’ की क्षमता, उड़ान की अवधि और विभिन्न एजेंसियों जैसे कि डीजीसीए और मौसम विभाग के बीच समन्वय का सफल परीक्षण किया गया.

दिल्ली सरकार और आईआईटी कानपुर के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत, कुल पांच क्लाउड सीडिंग ट्रायल किए जाने की योजना है, जिसकी अनुमानित लागत 3.21 करोड़ है. अधिकारियों को उम्मीद है कि कृत्रिम बारिश वायु प्रदूषण के कणों (पर्टिकुलेट मैटर) को ज़मीन पर लाने में मदद करेगी, जिससे अस्थायी रूप से वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में सुधार होगा. अब इंतजार है कि कब मौसम की अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं और दिल्ली को ऐतिहासिक कृत्रिम वर्षा से पहली बार देखने को मिलती है.

हालांकि, इससे पहले गुरुवार (23 अक्टूबर) को बुराड़ी क्षेत्र में किए गए पहले परीक्षण में वायुमंडल में नमी का स्तर 20 फीसद से कम होने के कारण वर्षा नहीं हो पाई थी, जबकि क्लाउड सीडिंग के लिए यह 50 फीसद के करीब होना चाहिए. विशेषज्ञों ने बताया कि दूसरे ट्रायल में बादलों और नमी की अनुकूल परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया है.

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो 28, 29 और 30 अक्टूबर को दिल्ली में कृत्रिम बारिश कराई जा सकती है. क्लाउड सीडिंग के इस प्रयास को दीपावली के बाद बढ़े वायु प्रदूषण के स्तर से निपटने के लिए एक त्वरित उपाय के रूप में देखा जा रहा है.

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