ग्रेटर नोएडा: पंजाब नेशनल बैंक में करोड़ों रुपये के घोटाले का एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बैंक की ही महिला कर्मचारी ने अपने सीनियर अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर तीन साल तक ग्राहकों के खातों और एफडी (FD) में ऐसी सेंधमारी की, जिसे सुनकर हर कोई भौचक्का है.
ग्राहकों की गाढ़ी कमाई से करीब 10.24 करोड़ रुपये की ठगी के इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच, गाजियाबाद यूनिट ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश तब हुआ, जब 16 सितंबर को संगीता नाम की एक ग्राहक बैंक में अपनी पासबुक अपडेट कराने पहुंचीं. उन्होंने देखा कि उनके खाते से तीन अनजान ट्रांजैक्शन हुए हैं. जब उन्होंने इसकी शिकायत की, तो आरोपी महिला कर्मचारी दीपांशी ने इसे तकनीकी खामी बताकर टालने की कोशिश की, लेकिन जब बैंक प्रबंधन ने वाउचर और लिखित अनुमति के दस्तावेजों की जांच की, तो एक भी रिकॉर्ड नहीं मिला.
Rs 35 Crore PNB Fraud: Bank Settles Rs 43 Lakh Claims, Promises To Pay Customers https://t.co/yAKrqRa0UY pic.twitter.com/momb5wjcf0
— NDTV (@ndtv) October 30, 2026
पूछताछ में दीपांशी ने जो कबूला, उसने बैंक अधिकारियों के होश उड़ा दिए. दीपांशी ने स्वीकार किया कि उसने अपने साथी अशुतोष पाठक के कहने पर ग्राहकों के पैसों को दूसरे खातों में ट्रांसफर किया और सबूत मिटाने के लिए वाउचर तक नष्ट कर दिए.
सीबीआई और पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी दीपांशी ने सीनियर ब्रांच मैनेजर निशा तिर्की समेत 6 बैंक अधिकारियों की सीबीएस यूजर आईडी और पासवर्ड का मिसयूज किया. ठगी के इस जाल को इतनी सफाई से बुना गया था कि ग्राहकों को कानों-कान खबर न हो. इसके लिए आरोपी ने कई खाताधारकों के मोबाइल अलर्ट ही बंद कर दिए, ताकि पैसे निकलने पर कोई मैसेज न पहुंचे. गबन की गई भारी-भरकम रकम अशुतोष पाठक के अलावा प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी और सरोज देवी जैसे लोगों के खातों में ट्रांसफर की जा रही थी.
गबन सिर्फ सेविंग्स अकाउंट्स तक ही सीमित नहीं रहा. जालसाजों ने ग्राहकों की फिक्स डिपॉजिट पर भी डाका डाला. जांच में सामने आया कि फर्जी तरीके से ज्वॉइंट अकाउंट होल्डर जोड़कर समय से पहले एफडी तुड़वाई गईं और पैसा फर्जी खातों में भेज दिया गया. बैंक रिकॉर्ड में 49 एफडी और करीब 70 करोड़ से अधिक की रकम दर्ज है, जिसकी कड़ियों को जोड़ने में एजेंसियां जुटी हैं.
नोएडा पुलिस को अब तक 37 से ज्यादा पीड़ित ग्राहक लिखित शिकायत दे चुके हैं. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक के मुख्य प्रबंधक अजय कुमार पांडेय की शिकायत पर सीबीआई ने दीपांशी, अशुतोष पाठक और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ बीएनएस, आईटी एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है. डीएसपी डॉ. जाहिर अख्तर के नेतृत्व में सीबीआई अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इस फर्जीवाड़े की जड़ें और कहां-कहां फैली हैं?

