दिल्ली: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा को भंग कर दिया है. राज्यपाल आरएन रवि ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत 7 मई 2026 से प्रभावी रूप से राज्य विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी किया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफा देने से इनकार करने के बाद गर्वनर का यह कदम, भाजपा को नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का रास्ता साफ करता है.
सूत्रों की मानें तो राजभवन कल, शुक्रवार को, चुनावों में बहुमत पाने वाली पार्टी को नई सरकार बनाने के लिए ऑफिशियली बुला सकता है. इसके बाद, संबंधित पार्टी गवर्नर को एक लेटर सौंपेगी, जिसमें बहुमत का सबूत दिया जाएगा. अब सभी की निगाहें नए चुने गए विधायकों के शपथ ग्रहण और नई सरकार के गठन पर टिकी हैं. मिली जानकारी के अनुसार BJP 9 मई को राज्य में नई सरकार बनाने वाली है.
Governor of West Bengal, RN Ravi, has issued an Order dissolving the West Bengal Legislative Assembly with effect from 07 May 2026. pic.twitter.com/IuEAylWege
— ANI (@ANI) May 7, 2026
बता दें कि 2026 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की निर्णायक जीत के बाद ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था. आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम ‘जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश’ है. कहा था कि विधानसभा का कार्यकाल 7-8 मई को समाप्त हो रहा है, इसलिए अभी इस्तीफा देने की कोई जरूरत नहीं है.
राजनीति के जानकारों के मुताबिक, आज़ादी के बाद से बंगाल के इतिहास में ऐसी स्थिति लगभग पहले कभी नहीं देखी गई. आमतौर पर, चुनाव परिणाम आने के बाद, मुख्यमंत्री अपना और अपनी कैबिनेट का इस्तीफ़ा देने के लिए राजभवन जाते हैं. फिर वे नई सरकार के शपथ लेने तक ‘केयरटेकर’ मुख्यमंत्री के तौर पर काम करते रहते हैं. ममता बनर्जी ने इस परंपरा को तोड़ दिया है.
बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न हुई. 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले गए. 4 मई को हुई मतगणना में भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल करते हुए बंगाल की सत्ता से तृणमूल कांग्रेस को बेदखल कर दिया. इस करारी शिकस्त के बावजूद ममता बनर्जी द्वारा इस्तीफा न देने और जनादेश को ‘साजिश’ बताने के चलते राज्य में संवैधानिक संकट पैदा हो गया. जिसके बाद राज्यपाल ने कैबिनेट बर्खास्त करने का फैसला लिया.
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की 294 सीटों में से भाजपा को 207 सीटें मिलीं, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट गई. कांग्रेस के खाते में 2 सीटें आईं.

