दिल्‍ली-एनसीआर

सुप्रीम कोर्ट- कांवड़ रूट पर दुकानदारों को नेमप्लेट लगाने की जरूरत नहीं , यूपी-उत्तराखंड सरकार से मांगा जवाब

दिल्‍ली: यूपी में कांवड़ रास्ते में होटलों, ढाबों पर नाम लिखने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी. कोर्ट ने कहा कि दुकानदारों को पहचान बताने की जरूरत नहीं है. कोर्ट ने यूपी और उत्तराखंड, मध्य प्रदेश को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने शुक्रवार तक जवाब मांगा. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अल्पसंख्यकों की पहचान कर उनका आर्थिक बहिष्कार किया जा रहा है. यह एक चिंताजनक स्थिति है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस भट्टी ने केरल यात्रा से जुड़ी कहानी सुनाई.

बहस के दौरान सोमवार को याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सीयू सिंह ने कहा कि शिवा ढाबा की एक चेन है. इसने पूरे भारत में चेन बना रखी है. इसे कोई भी चला सकता है, चाहे वह सिख हो, मुस्लिम हो या ईसाई. इस पर बेंच ने पूछा कि क्या सरकार का कोई औपचारिक आदेश है कि इन्हें प्रदर्शित किया जाना चाहिए? क्योंकि यह कहा जा रहा है कि यह स्वैच्छिक है. इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने कहा कि यह एक छद्म आदेश है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा वाले रास्तों पर पड़ने वाली खाने-पीने की दुकानों पर उनके मालिकों का नाम लिखने का आदेश दिया था. राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि कांवड़ यात्रियों की आस्था की शुचिता बनाए रखने के लिए ये फैसला लिया गया है. 20 जुलाई को उज्जैन के मेयर ने भी दुकान के मालिकों को अपने नाम और फोन नंबर वाली नेमप्लेट लगाने के लिए कह दिया.

कांवड़ियों पर यूपी सरकार का आदेश अब सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है. एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स नाम के एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके यूपी सरकार के आदेश को रद्द करने की मांग की है. यह याचिका 20 जुलाई की सुबह 6 बजे ऑनलाइन दाखिल की गई है. सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने मामले को सुनवाई के लिए लिस्ट कर लिया है. याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस ऋषिकेश रॉय और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच 22 जुलाई को सुनवाई करेगी.

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