उत्तराखंड

समान नागरिक संहिता (UCC) क्या और कहां बदल जाएंगे नियम, जानिए यूसीसी की 10 बड़ी बातें

उत्तराखंड: विधानसभा में आज समान नागरिक संहिता विधेयक पेश कर दिया गया है. जिसको आज ही धामी सरकार पास करवाकर राजभवन भेज सकती है. इसके बाद राज्यपाल की मुहर लगते ही ये कानून बन जाएगा और यूसीसी लागू हो जाएगा. इस तरह से यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन जाएगा. हालांकि अभी से इसके लागू होने के बाद बदलने वाले नियमों और कानूनों को लेकर बहस शुरू हो गई है.

उत्तराखंड की धामी सरकार यूसीसी को लाने में बहुत तेजी से काम किया है. 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान धामी ने दोबारा सरकार आने पर यूसीसी लागू करने की बात कही. इसके बाद चुनाव जीतते ही पहली कैबिनेट में सीएम धामी ने समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए 27 मई 2022 को जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की.

समिति ने दो फरवरी को अपना ड्राफ्ट सौंपा और आज सीएम धामी ने विधेयक विधानसभा में पेश कर दिया. चार खंडों व 740 पेज का ड्राफ्ट सरकार को सौंपा गया. जिसके बाद प्रदेश की आधी आबादी पर इसका सीधा असर पड़ेगा. जो विधेयक सरकार ने पेश किया है, उसमें विवाह, तलाक, लिव इन रिलेशनशिप, बच्चों को गोद लेने आदि कई अहम बिंदुओं पर सख्त कानून बनाने की संस्तुति की गई है.

समान नागरिक संहिता की 10 बड़ी बातें

  1. सभी धर्मों में विवाह की आयु लड़की के लिए 18 वर्ष अनिवार्य करने का प्रस्ताव किया है.
  2. बहुपत्नी प्रथा समाप्त कर एक पति पत्नी का नियम सभी पर लागू करने पर बल दिया गया है.
  3. प्रदेश की जनजातियों को इस कानून की परिधि से बाहर रखा गया है.
  4. संपत्ति बंटवारे में लड़की का समान अधिकार सभी धर्मों में लागू रहेगा.
  5. अन्य धर्म या जाति में विवाह करने पर भी लड़की के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकेगा.
  6. लिव इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण कराना आवश्यक होगा.
  7. लव जिहाद, विवाह समेत महिलाओं और उत्तराधिकार के अधिकारों के लिए सभी धर्मों के लिए समान अधिकार की बात की गई है.
  8. यूसीसी में गोद लिए हुए बच्चों, सरोगेसी द्वारा जन्म लिए गए बच्चों व असिस्टेड रीप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी द्वारा जन्म लिए गए बच्चों को अन्य की भांति जैविक संतान ही माना गया है.
  9. किसी व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात उसकी संपत्ति में उसकी पत्नी व बच्चों को समान अधिकार दिया गया है.
  10. उसके माता-पिता को भी उसकी संपत्ति में समान अधिकार दिया गया है.

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