उत्तराखंड

केदारनाथ में गूंजने वाली मधुर आवाज हुई शांत ,वेदपाठी मृत्युंजय हीरेमठ ने 31 साल में ही दुनिया को कहा अलविदा

उत्तराखंड: केदारपुरी में गूंजने वाली भजनों की आवाज अब हमेशा के लिए यादगार बनकर रह गई है. हर सुबह और संध्याकाल में मन्दिर मधुर आवाज से भक्तों को भावविभोर करने वाली आवाज अब सदा के लिए थम गई है. श्री केदारनाथ धाम में वेदपाठी का कार्य संभाल रहे 31 वर्षीय मृत्युंजय हीरेमठ का निधन हो गया है.

बताया जा रहा है कि दिल का दौरा पड़ने से वेदपाठी मृत्युंजय हीरेमठ का शरीर शांत हो गया है. मृत्युंजय हीरेमठ केदारनाथ धाम और ओंकारेश्वर मंदिर में वेदपाठी के पद पर कार्यरत थे।ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ के वेदपाठी मृत्युंजय हीरेमठ के निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है.उखीमठ में उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान लोग भावुक हो गए.

सेवानिवृत्त पुजारी 107 श्री गुरु लिंग जी महाराज के चार पुत्रों में सबसे छोटे पुत्र थे. वें केदारनाथ,ओंकारेश्वर मन्दिर ऊखीमठ में वेदपाठी के पद पर कार्यरत थे‌. बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करने के बाद वें घर लोटे, घर पर ही अचानक उन्हें हृदय घात होने से उनकी अकाल मौत हो गईं. आज शैव परम्परा के अनुसार उनको मन्दिर समिति के अधिकारीयों कर्मचारियों,तीर्थ पुरोहितों,क्षेत्रीय जनता की मौजूदगी में ऊखीमठ में इस महान धार्मिक ज्ञानी को नम आंखो से समाधि दी गई.

दक्षिण भारत के जंगम सेवा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले मृत्युंजय हीरेमठ अविवाहित थे. उनका परिवार अब स्थाई रूप से उखीमठ में ही निवास करता है. उनके बड़े भाई शिव शंकर लिंग मंदिर समिति केदारनाथ प्रतिष्ठान में पुजारी के पद पर हैं. मृत्युंजय हीरेमठ का बचपन गुप्तकाशी में ही बीता. देश-विदेश में बाबा केदारनाथ के भक्त मृत्युंजय को उनके मधुर मंत्रों और आरतियों से पहचानते हैं. उनके सुमधुर भजनों से गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर हमेशा गुंजायमान रहता है. मृत्युंजय हीरेमठ केदारनाथ धाम और ओंकारेश्वर मंदिर में वेदपाठी के पद पर कार्यरत थे.

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