उत्तराखंड: राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा संगठन महापर्व ने तहत सदस्यता अभी की शुरुआत हो गई है. इसी क्रम में मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भाजपा कार्यालय पहुंचकर भाजपा की सदस्यता का रिन्यूअल किया. सीएम धामी के सदस्यता रिन्यूअल के बाद प्रदेश स्तर पर भाजपा के संगठन महापर्व की शुरुआत हो गई है. सदस्यता अभियान के तहत भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ ही भाजपा के तमाम वरिष्ठ नेताओं को पार्टी की सदस्यता रिन्यूअल कराई.
सीएम धामी के सदस्यता रिन्यूअल के बाद चार-सितंबर से जिलों में स्थानीय सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ ही वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी सदस्यता दिलाई जाएगी. इसके बाद घर-घर संपर्क अभियान के बाद बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और फिर 16 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2024 तक पार्टी सक्रिय सदस्यता के लिए अभियान चलाएगी. ताकि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ले चुके नेताओं को पार्टी की सक्रिय सदस्यता दिलाई जा सके.
आप सभी से आग्रह है कि टोल-फ्री नंबर 8800002024 पर मिस्ड कॉल कर अथवा नमो ऐप के माध्यम से विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक संगठन भाजपा के सदस्य बनें।#BJPSadasyata2024 pic.twitter.com/Mr5xtvP2IS
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) September 3, 2024
तय किए गए कार्यक्रमों के अनुसार, भाजपा के सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि इस साल यानी 2024 में हर रविवार को कम से कम 20 नए लोगों को पार्टी का सदस्य बनाएंगे. हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मशताब्दी वर्ष के लिए संगठन ने ये लक्ष्य निर्धारित किया है. इसके साथ ही भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम को भी इस बार सदस्यता अभियान से जोड़ने का निर्णय लिया है. ऐसे में 29 सितम्बर और 27 अक्टूबर को होने वाले पीएम के मन की बात कार्यक्रम को सदस्यता पर्व के साथ जोड़कर अधिक से अधिक सदस्य बनाए जाएंगे.
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ये सिर्फ सदस्यता अभियान नहीं है, बल्कि ये संगठन का महापर्व है. पार्टी को मजबूत और सशक्त बनाने के लिए नए सदस्य जोड़े जा रहे हैं. भाजपा की ये परिपाटी है कि अपने सदस्यों की परिवार की तरह सम्मान देते हैं और सदस्य बनाने के बाद उनको भूलते नहीं हैं. भाजपा बूथ स्तर पर काम करने वाले हर एक कार्यकर्ता को उसी तरह से सम्मान देती है, जैसे पार्टी के बड़े नेताओं को सम्मान दिया जाता है. राष्ट्र भावना को प्रथम मानकर बड़े निर्णय लिए गए हैं.

