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गांधी जी ने जिसे "रक्तहीन क्रांति" का नाम दिया था, उत्तराखंड की कुली बेगार प्रथा पर सफल नाट्य मंचन - TV News Today
उत्तर प्रदेश

गांधी जी ने जिसे “रक्तहीन क्रांति” का नाम दिया था, उत्तराखंड की कुली बेगार प्रथा पर सफल नाट्य मंचन

सुशील कुमार शर्मा

गाजियाबाद: गढ़वाली कुमाऊनी जौनसारी अकादमी- दिल्ली सरकार के सौजन्य से आयोजित “बाल उत्सव-2025” में नाटक “झन दिया कुली बेगारा” का मंचन दिल्ली कात्यायनी सभागार, मयूर विहार में 25 जून को हुआ. नाटक की परिकल्पना, आलेख व निर्देशन रंग निर्देशक मीना पांडेय द्वारा किया गया व सह निर्देशन था गीतिका मेहता का. एक “रक्तहीन क्रांति” के नाम से विख्यात “कुली बेगार प्रथा” पर आधारित यह नाटक दर्शकों द्वारा काफी सराहा गया. कुली बेगार यानि बिना मजदूरी बोझ उठवाना. उन्नीसवीं शताब्दि के प्रारंभ में यह प्रथा उत्तराखंड में व्यापत थी. इस प्रथा के माध्यम से अंग्रेज आम जनता का शोषण करते थे.

जनवरी 1921 में “कुमाऊं केसरी” नाम से विख्यात बद्री दत्त पांडे द्वारा उत्तरायणी मेला बागेश्वर में एक विशाल जनान्दोलन किया गया था जहां सरयू नदी में सारे कुली रजिस्टर बहाकर कुली बेगार न देने की शपथ ली गई. गांधी जी ने इस आंदोलन को एक “रक्तहीन क्रांति” का नाम दिया क्योंकि बिना रक्त की एक बूंद बहे अहिंसात्मक रूप से यह क्रांति हुई और सफल रही.

नाटक में संगीत संयोजन था जीवन चंद्र कलखुंडिया का और रूप सज्जा में थे सुप्रसिद्ध मेकअप आर्टिस्ट हरी खोलिया व मंच पर सहयोग रहा सुचिता साहु का. साहिबाबाद (गाजियाबाद) में निवास कर बहुआयामी प्रतिभा की धनी प्रख्यात रंगकर्मी, लेखिका व नृत्यांगना मीना पांडेय पिछले 8-10 सालों से निरंतर रंगकर्म से जुड़ी रही हैं. इस अंतराल में उन्होंने कई नाटकों में अभिनय करने के साथ 5 नाटकों का सफल निर्देशन किया है. नाटक ‘झन दिया कुली बेगारा’ के विषय में बात करते हुए मीना पांडेय ने बताया कि उनका उद्देश्य था कि बच्चे हमारे क्षेत्र के उन महान जननायकों को जाने जिन्होंने अपने प्रयासों से स्वतंत्रता आंदोलन को बल दिया. मगर नई पीढ़ी उनके नाम से अनभिज्ञ है.

कुली बेगार आंदोलन नई पीढ़ी के लिए इस अर्थ में भी प्रेरणादायक है कि किस तरह अहिंसात्मक रूप से एकजुट होकर शोषण और अत्याचार का विरोध किया जा सकता है. कलाकारों में लक्ष्मी के रूप में नेहा, बद्री दत्त पाण्डेय के रूप में भव्य चंद्र, हरगोविंद पंत के रूप में शनाया चौधरी, गांधी जी के रूप में दक्ष रावत, पटवारी के रूप में सृजन पाण्डेय ( मीना पाण्डेय का सुपुत्र ), अर्दली के रूप में सार्थक नेगी, कायर्कर्ता के रूप में आलिया और डाईविल के रूप में जाह्नवी के अभिनय को विशेष रूप से सराहना मिली. इसके अतिरिक्त अन्य भूमिकाओं में थे- शनाया रावत, रितिक, एकता, साक्षी मानवी, निशा, निर्मला, शगुन, लक्ष्मी, विवान, युवान, सरस्वती, पूर्णिमा, समृद्धि पाण्डेय, आदिरा, अंशिका, राशि, शिवानी.

दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में अकादमी से राजू तिवारी , श्रीमती मनराल, के. एन. पाण्डेय, पर्वतीय कला केन्द्र के संयुक्त सचिव के. एस. बिष्ट व राकेश शर्मा सहित सैकडों गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे.

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