उत्तर प्रदेश नॉर्थ टेक सिम्पोजियम के समापन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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नॉर्थ टेक सिम्पोजियम के समापन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश: नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 के समापन पर बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहुंचे. इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के अंदर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर तेजी के साथ आगे बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है.

उन्होंने कहा कि शांति और क्षमा की भाषा केवल वही बोल सकता है जिसके पास सामर्थ्य हो. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज भारत आयात प्रधान से निर्यात प्रधान राष्ट्र की ओर बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा कि प्रयागराज की पावन धरा प्राचीन काल से ही ज्ञान और आध्यात्मिक विरासत की और न्याय की पावन त्रिवेणी के रूप में विख्यात रही है. उन्होंने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि आज नॉर्थ टेक सिम्पोजियम के माध्यम से हम सब इस त्रिवेणी को टेक्नोलॉजी, नाॅलेज और इनोवेशन के संगम के रूप में भी प्रस्तुत कर रहे हैं.

सीएम योगी ने कहा हमारी भारतीय मान्यता रही है और हमने इसे स्वीकार भी किया कि संपूर्ण वसुधा को हम एक परिवार के रूप में अपने साथ जोड़ने और उसके प्रति उदार भाव भारतीय संस्कृति की सदैव से एक प्रेरणा रही है. उन्होंने कहा कि उदारता हमारा संस्कार है, करुणा हमारा स्वभाव, परंतु हमें यह ध्यान रखना होगा जो सुरक्षित है वही समृद्धि भी है.

उन्होंने कहा कि शांति और क्षमा की भाषा केवल वही बोल सकता है, जिसके पास सामर्थ्य हो. उन्होंने कहा कि हमारी उदारता को कोई हमारी विवशता न समझने की भूल करे. सीएम योगी ने कहा कि समृद्धि के लिए सुरक्षा, स्थिरता की भी जरूरत होती है. उन्होंने कहा कि 2017 से पहले यूपी की जो छवि थी, उस समय पहचान का संकट था.

उन्होंने कहा कि सुशासन के लक्ष्य को पाना है तो सुरक्षा का वातावरण बनाना होगा. रुल ऑफ लॉ को धरातल पर लाना होगा. उन्होंने कहा कि कोई गुंडा और माफिया अब हस्तक्षेप नहीं करता है, क्योंकि उसको अंजाम पता है. कानून व्यवस्था हमारे यूपी के लिए जरूरत थी. उसका परिणाम है कि आज डिफेंस सेक्टर में भी निवेश आ रहा है. रक्षा के क्षेत्र में भी आज यूपी काफी काम कर रहा है. राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं, यह हमारे लिए सर्वोपरि है.

उन्होंने कहा कि मैं मानता हूं हमारे सैनिक सियाचिन की जमा देने वाली ठंड हो, रेगिस्तान की तपती रेत हो, घने जंगलों का अंधकार हो या समुद्र और आकाश की अनंत चुनौतियां हों, जहां जीवन ठहर जाता है वहीं से हमारे सैनिकों का कर्तव्य शुरू होता है. उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों के कदम जहां पड़ते हैं, वहीं से भारत की सीमाएं मजबूत होती हैं.

उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों की जगती हुई आंखों के कारण पूरा देश चैन की नींद सोता है. हम सबको इस बारे में देखना होगा. सिंपोजियम के माध्यम से हम सब इस बात पर जरूर गौर करें कि आज युद्ध सिर्फ जल, थल और नभ तक सीमित नहीं रहा है.

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