दिल्ली : केंद्र सरकार ने फ्रांस से नए राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने की हरी झंडी दे दी है. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में इस सौदे को मंजूरी दी गई. बता दें कि पिछले साल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान राफेल की क्षमता पूरी दुनिया ने देखी थी, जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ रणनीतिक बढ़त बनाई थी.
केंद्र सरकार ने 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने के लिए ‘Acceptance of Necessity’ जारी कर दी है. यह सौदा करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये का होगा. इसके तहत लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये विमानों की खरीद पर खर्च किए जाएंगे, जबकि शेष राशि हथियार प्रणालियों, स्पेयर पार्ट्स और लॉजिस्टिक सपोर्ट पर खर्च होगी. माना जा रहा है कि इस डील से वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या बढ़ने के साथ ही भारत की सामरिक बढ़त काफी मजबूत होगी.
Defence Acquisition Council clears procurement projects worth Rs 3.60 lakh crore: Defence ministry.
Defence Acquisition Council approves proposal to procure 114 Rafale jets for Indian Air Force: Officials.
Retail inflation at 2.75 pc in January under new CPI series: Government. pic.twitter.com/ckBfHBm5vi
— Press Trust of India (@PTI_News) February 12, 2026
बताया जाता है कि सिर्फ लड़ाकू विमान ही नहीं, समुद्री मोर्चे पर भी केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. इसी क्रम में 6 पी-8आई समुद्री गश्ती विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई है, जिसकी अनुमानित लागत 28 हजार करोड़ रुपये है. साथ ही हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम्स पर करीब 15 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. यह सिस्टम खुफिया, निगरानी और टोही अभियानों में अहम भूमिका निभाएंगे और भारतीय नौसेना की एंटी-सबमरीन क्षमता को नई मजबूती प्रदान करेंगे.
रिपोर्ट के मुताबिक, 114 विमानों में से 18 राफेल लड़ाकू विमान सीधे फ्रांस से पूरी तरह तैयार होकर आएंगे, जबकि बाकी 96 राफेल विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ मिलकर काम करेगी. इस सौदे के बाद भारतीय वायुसेना के बेड़े में राफेल विमानों की कुल संख्या बढ़कर 176 हो जाएगी. जिनमें 36 पुराने, 114 नए और 26 भारतीय नौसेना के लिए हैं. राफेल की सबसे बड़ी ताकत उसकी अत्याधुनिक हथियार प्रणाली है. यह Meteor मिसाइल से लैस है, जिसकी मारक क्षमता 100 किलोमीटर से अधिक है और इसे दुनिया की सबसे उन्नत हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों में गिना जाता है.
डीएसी से एओएन मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव पर औपचारिक बातचीत शुरू होगी. अंतिम मंजूरी प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट समिति यानी सीसीएस द्वारा दी जाएगी. माना जा रहा है कि विमानों की डिलीवरी 2030 तक शुरू हो सकती है.

