दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली को भविष्य की वैश्विक जरूरतों के अनुरूप ढालने और सुनियोजित विकास देने के लिए वर्षों से प्रतीक्षित मास्टर प्लान आखिरकार गुरुवार को जारी कर दी गई. शुरुआती दौर में इस योजना का खाका वर्ष 2041 की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा था, लेकिन दूरगामी सोच के साथ अंतिम समय में इसमें बड़ा बदलाव किया गया. अब इसे देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे होने यानी साल 2047 तक की अनुमानित 3.2 करोड़ की आबादी और चुनौतियों को ध्यान में रखकर अपग्रेड किया गया है.
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ‘मास्टर प्लान दिल्ली 2047’ (MPD-2047) का अनावरण किया. इस मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू भी मौजूद थे. उन्होंने कहा यह मास्टर प्लान केवल एक शहरी विकास दस्तावेज नहीं, बल्कि दिल्ली को एक वैश्विक, समावेशी, आर्थिक रूप से जीवंत और पर्यावरण के अनुकूल राजधानी बनाने का एक महात्वाकांक्षी ब्लूप्रिंट है.
दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर दिल्ली मास्टर प्लान 2047 जारी किया। pic.twitter.com/7rldWemQk0
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 20, 2026
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि, जब भारत अपनी आज़ादी की शताब्दी के जश्न की ओर बढ़ रहा है, तब ‘विकसित भारत @ 2047’ के राष्ट्रीय संकल्प को धरातल पर उतारने और दिल्ली को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने के लिए राजधानी अब पूरी तरह तैयार है.
दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार यह मास्टर प्लान लगभग 3.2 करोड़ की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर बनाया गया है. केंद्रीय मंत्री खट्टर ने स्पष्ट किया कि दिल्ली अब केवल प्रशासनिक केंद्र नहीं, बल्कि आर्थिक विकास और नवाचार का इंजन बनेगी. इस मास्टर प्लान का मूल मंत्र ‘विकास-उन्मुख शहरी नियोजन’ है, जो निवेश, नवाचार और रोजगार के नए द्वार खोलेगा.
MPD-2047 की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर-लेड ग्रोथ मॉडल’ है. इसका अर्थ है कि विकास वहां होगा, जहां बुनियादी ढांचा पहले से उपलब्ध है या विकसित किया जा रहा है. सड़कों, सार्वजनिक परिवहन, जलापूर्ति और डिजिटल कनेक्टिविटी को विकास का आधार बनाया गया है.
- ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD): मास्टर प्लान में सार्वजनिक परिवहन और आवास को एकीकृत करने पर विशेष जोर दिया गया है. मेट्रो स्टेशनों और प्रमुख परिवहन गलियारों के आसपास सघन विकास किया जाएगा, ताकि लोग अपने कार्यस्थलों के करीब रह सकें और यात्रा का समय कम हो.
- आर्थिक गलियारे और औद्योगिक क्लस्टर: दिल्ली को निवेश-सुलभ बनाने के लिए आधुनिक वाणिज्यिक जिले और औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे. नरेला में 138 हेक्टेयर में फैला ‘एजुकेशन हब’ एक प्रमुख आकर्षण होगा, जो तकनीक और उद्यमिता का केंद्र बनेगा.

