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भारत-पाकिस्तान विभाजन की पीड़ा‘ 81 माइल्स’ के लेखक, अभिनेता, निर्देशक नवीन भास्कर द्वारा मारवाह स्टूडियो में एकल मंचन कर दर्शकों का दिल जीता

सुशील कुमार शर्मा

नोएडा: जब इतिहास केवल पुस्तकों के पन्नों तक सीमित न रहकर मंच पर साँस लेने लगे, जब एक अकेला कलाकार अनेक पात्रों की संवेदनाओं को अपनी आवाज़, भाव-भंगिमा और अभिनय से जीवंत कर दे, तब रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह जाता, बल्कि समाज के अंतर्मन को झकझोरने वाला सशक्त संवाद बन जाता है. ऐसा ही अविस्मरणीय क्षण गत 16 जुलाई को एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविज़न , नोएडा के सभागार में देखने को मिला, जहाँ अद्विक पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित चर्चित उपन्यास ‘81 माइल्स, ए ट्रू अनटोल्ड स्टोरी’ का एक घंटे का प्रभावशाली एकल रंगमंचीय मंचन प्रस्तुत किया गया.

भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी पर आधारित इस संवेदनशील कथा को लेखक, निर्देशक एवं अभिनेता नवीन कुमार भास्कर ने अपने अद्भुत सोलो अभिनय के माध्यम से ऐसी जीवंतता प्रदान की कि पूरा सभागार मानो 1947 के उन दर्दनाक पलों का प्रत्यक्ष साक्षी बन गया. एक ही कलाकार ने अनेक पात्रों की मन स्थितियों, भावनाओं, संघर्षों और रिश्तों की टूटन को जिस सशक्त ढंग से प्रस्तुत किया, उसने दर्शकों को आरंभ से अंत तक अपनी सीटों से बाँधे रखा. नाटक केवल विभाजन की ऐतिहासिक घटना का चित्रण नहीं था, बल्कि यह मनुष्यता, विस्थापन, बिछड़ते परिवारों, टूटते विश्वास, सांप्रदायिक विद्वेष और शांति की आकांक्षा का अत्यंत संवेदनशील दस्तावेज़ बनकर सामने आया. प्रस्तुति ने यह संदेश भी दिया कि सीमाएँ देशों को बाँट सकती हैं, लेकिन मानवता की संवेदनाओं को कभी विभाजित नहीं कर सकतीं.

मंचन के दौरान सभागार में कई ऐसे क्षण आए जब दर्शकों की आँखें नम हो गईं। संवादों की मार्मिकता, प्रकाश एवं ध्वनि संयोजन, प्रभावशाली अभिव्यक्ति और नवीन कुमार भास्कर की अभिनय क्षमता ने पूरे वातावरण को भावनात्मक बना दिया। एक घंटे तक सभागार में ऐसा सन्नाटा पसरा रहा मानो प्रत्येक दर्शक स्वयं उस इतिहास को जी रहा हो. जैसे ही प्रस्तुति समाप्त हुई, पूरा सभागार देर तक गूँजती तालियों से भर उठा. यह तालियाँ केवल एक कलाकार के उत्कृष्ट अभिनय के लिए नहीं थीं, बल्कि उस इतिहास, उस पीड़ा और उस मानवीय संवेदना के प्रति सम्मान का प्रतीक थीं, जिसे मंच पर अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संदीप मारवाह ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य और रंगमंच समाज के संवेदनशील दर्पण हैं. ऐसी प्रस्तुतियाँ नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी सुदृढ़ करती हैं. उन्होंने कलाकार एवं पूरी रचनात्मक टीम को इस प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए बधाई दी। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों में अद्विक पब्लिकेशन के संस्थापक अशोक गुप्ता, किआन फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शालिनी अगम, लक्ष्मी शंकर बाजपेई, सुभाष चंदर, वन्दना यादव, ओमप्रकाश प्रजापति, देवेन्द्र शर्मा, आलोक यात्री, शिवराज सिंह, शकील अहमद सहित साहित्य, पत्रकारिता, रंगकर्म और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही.

सभी अतिथियों ने इस प्रस्तुति को समकालीन समय में अत्यंत प्रासंगिक बताते हुए कहा कि विभाजन की त्रासदी को केवल इतिहास की घटना नहीं, बल्कि मानवता के लिए सीख के रूप में याद रखा जाना चाहिए. सभागार खचाखच भरा हुआ था. साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों, रंगकर्मियों तथा कला-संस्कृति से जुड़े लोगों की बड़ी संख्या ने कार्यक्रम में सहभागिता की. दर्शकों की सक्रिय उपस्थिति और प्रस्तुति के प्रति उनकी भावनात्मक सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि सार्थक साहित्य और गंभीर रंगमंच आज भी समाज में अपनी गहरी प्रासंगिकता बनाए हुए हैं.

“81 माइल्स, ए ट्रू अनटोल्ड स्टोरी” का यह मंचन केवल एक नाटक नहीं, बल्कि इतिहास, साहित्य और रंगमंच का ऐसा सशक्त संगम था जिसने दर्शकों को अतीत की त्रासदी से रूबरू कराते हुए वर्तमान में शांति, सद्भाव और मानवीय एकता के संदेश को नई ऊर्जा के साथ स्थापित किया. यह प्रस्तुति इस बात का प्रमाण भी बनी कि जब साहित्य मंच पर उतरता है, तो वह केवल कहानी नहीं कहता, बल्कि समाज के भीतर संवेदनाओं की नई चेतना भी जगाता है. आज जब विश्व के अनेक हिस्सों में संघर्ष, विस्थापन और सामाजिक विभाजन जैसी परिस्थितियाँ पुनः चिंता का विषय बनी हुई हैं, ऐसे समय में इस प्रकार की रंगमंचीय प्रस्तुतियाँ केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता के पक्ष में एक सशक्त सांस्कृतिक हस्तक्षेप हैं। “81 माइल्स, ए ट्रू अनटोल्ड स्टोरी” ने यह संदेश पुनः स्थापित किया कि कला की सबसे बड़ी शक्ति मनुष्य को मनुष्य से जोड़ना है और यही किसी भी सृजन की सबसे बड़ी सफलता है.

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