दिल्ली: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आगामी कांवड़ यात्रा को ऐतिहासिक, सुगम, भक्तिभाव से परिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए उच्च स्तरीय ‘कांवड़ समिति’ का पुनर्गठन किया है. दिल्ली सरकार के संस्कृति व कानून मंत्री कपिल मिश्रा को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच विधायकों को बतौर सदस्य इसमें शामिल किया गया है.
मुख्यमंत्री का कहना है कि दिल्ली सरकार इस बार भी शिवभक्तों के लिए सम्मानजनक एवं बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करेगी. इसके लिए कांवड़ शिविरों को विशेष सहायता दी जाएगी. मुख्यमंत्री के अनुसार कपिल मिश्रा कांवड़ समिति के अध्यक्ष होंगे, जबकि विधायक अजय महावर, अनिल शर्मा, करनैल सिंह, संजय गोयल व उमंग बजाज को समिति में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है.
उच्च स्तरीय कांवड़ समिति का पुनर्गठन किया गया है। कैबिनेट मंत्री श्री @KapilMishra_IND जी को समिति का अध्यक्ष और विधायक श्री @AjayMahawarBJP, श्री @AnilSharma4BJP, श्री @KarnailSinghBJP, श्री @BJPSanjayGoyal और श्री @Umang_bjp को सदस्य नियुक्त किया गया है।
दिल्ली सरकार का संकल्प…
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) May 30, 2026
मुख्यमंत्री ने कहा है कि कांवड़ यात्रा केवल एक पारंपरिक धार्मिक आयोजन मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अटूट सामाजिक समरसता और जनआस्था का एक विराट महोत्सव है. उन्होंने कहा कि सावन माह में दिल्ली की सड़कों पर उमड़ने वाला शिवभक्तों का सैलाब देश की सांस्कृतिक एकता को प्रदर्शित करता है.
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि कपिल मिश्रा की अध्यक्षता में एक नवगठित समिति का गठन किया गया है. यह समिति जल्द ही दिल्ली के सभी जिलाधिकारियों, दिल्ली पुलिस, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करेगी.
मुख्यमंत्री ने पिछली यात्राओं की तुलना करते हुए सरकार के ऐतिहासिक प्रयासों को रेखांकित किया. उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में दिल्ली में केवल 170 कांवड़ शिविरों को मंजूरी मिली थी, लेकिन सरकार की सरल और पारदर्शी नीतियों के चलते वर्ष 2025 में यह संख्या रिकॉर्ड स्तर पर बढ़कर 374 पहुंच गई. दिल्ली सरकार ने शिवभक्तों के सेवा कार्यों में लगी समितियों के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए कई बड़े निर्णय लिए हैं.
उन्होंने बताया कि पुरानी टेंडर प्रथा को खत्म कर सरकार ने शिविर संचालकों के बैंक खातों में सीधे 50,000 रुपये से लेकर 11 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की. इसका 50 प्रतिशत हिस्सा एडवांस के रूप में पहले ही जारी कर दिया गया था. प्रत्येक पंजीकृत शिविर को 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी गई. साथ ही, अस्थाई बिजली मीटर के सिक्योरिटी डिपॉजिट में 75 प्रतिशत की भारी कटौती की गई.
इन बिंदुओं पर होगा समिति का मुख्य फोकस
- रूट मैनेजमेंट: कांवड़ियों के लिए सुगम और सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना.
- आधारभूत संरचना: वॉटरप्रूफ टेंटों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना.
- सुविधाएं: 24 घंटे निर्बाध बिजली और पानी की आपूर्ति.
- सुरक्षा और स्वास्थ्य: चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता और चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था.

