उत्तर प्रदेश

गाजियाबादः सेप्टिक टैंक से निकलने वाले अपशिष्ट से तैयार होगी खाद, 8 लाख लोगों को मिलेगा फायदा

उत्तर प्रदेश: शहरी क्षेत्र की तरह ग्रामीण क्षेत्र में सीवर पाइपलाइन उपलब्ध नहीं होती है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग अपने घर के आसपास ही सेप्टिक टैंक का निर्माण करवाते है. इसी सेप्टिक टैंक में शौचालय से निकलने वाला वेस्ट मटेरियल एकत्रित होता है. कुछ वक्त के बाद इस सेप्टिक टैंक को साफ करवाना आवश्यक होता है. ऐसे में सफाई के दौरान सेप्टिक टैंक से अपशिष्ट को निकाला जाता है. कई बार देखा गया है कि सेप्टिक टैंक से निकलने वाले अपशिष्ट को कहीं भी फेंक दिया जाता है, जिसके चलते बीमारियां होने या फिर गंदगी होने की संभावना बनी रहती है. ऐसे में इस समस्या से निजात पाने के लिए गाजियाबाद जिला प्रशासन द्वारा एक नई पहल की शुरुआत की जा रही है.

गाजियाबाद में तकरीबन आठ लाख से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है. अनुमान के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्र में तकरीबन पचास हजeर से अधिक सेप्टिक टैंक मौजूद है. ऐसे में इन सेप्टिक टैंक से निकलने वाले वेस्ट मटेरियल का अब न सिर्फ सही ढंग से निस्तारण होगा बल्कि इस वेस्ट मटेरियल से खाद बनाया जाएगा. जिला प्रशासन की ओर से सेप्टिक टैंक से निकलने वाले स्लज यानी कि मल-मूत्र अपशिष्ट से खाद तैयार किया जाएगा. इस पहल को धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में दो फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे.

फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) के माध्यम से सेप्टिक टैंक से निकलने वाले मल मूत्र के अपशिष्ट को खाद के रूप में तैयार किया जाएगा. जिला प्रशासन द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में दो फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है. जिलाधिकारी ने डीपीआरओ को फीकल ट्रीटमेंट प्लांट के लिए भूमि चिह्नित करने के निर्देश दिए थे. डीपीआरओ की ओर से भूमि का चिह्नांकन कर शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है. अब शासन की टीम चिह्नित भूमि का सर्वे करने के लिए आएगी. सर्वे पूरा होने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी.

मिली जानकारी के मुताबिक, एफएसटीपी स्थापित होने के बाद ग्राम पंचायत में स्थित घरों के सेप्टिक टैंक से निकलने वाले स्लज को विशेष वाहनों के माध्यम से एकत्र कर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा. वहां पर वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत उपचार किया जाएगा. उपचार के पश्चात हानिकारक तत्वों की समाप्ति के बाद अपशिष्ट को जैविक खाद में परिवर्तित किया जाएगा, जो किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा. इस प्रकार यह परियोजना न केवल स्वच्छता को बढ़ावा देगी, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी लाभान्वित करने में अहम भूमिका निभाएगी.

डीपीआरओ जाहिद हुसैन ने बताया, फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट को लगभग एक एकड़ भूमि में स्थापित किया जाएगा. प्रशासन की ओर से ऐसी दो ग्राम पंचायत का चयन किया गया है, ताकि अधिक से अधिक ग्रामों को इस सुविधा का लाभ मिल सके. यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इन प्लांट की स्थापना ऐसे स्थान पर हो जहां से आसपास के गांव तक आसानी से पहुंच बनाई जा सके और अपशिष्ट के परिवहन में किसी प्रकार की कोई बाधा ना हो. साथ ही यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि इन प्लांट को आबादी से लगभग आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थापित किया जाएगा. इसका मुख्य उद्देश्य है कि प्लांट से उत्पन्न होने वाली संभावित दुर्गंध, शोर या फिर संक्रमण का असर वहां रहने वाली आबादी पर ना पड़े. इस पहल के माध्यम से ग्रामीण स्वच्छता के स्तर को एक नई उचाई तक ले जाने का प्रयास किया जा रहा है.

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