उत्तराखंड

उत्तराखंड के हाई एल्टीट्यूड में एडवेंचर का रोमांच, जोरों पर मैराथन की तैयारियां

उत्तराखंड: लद्दाख की तर्ज पर उत्तराखंड में हाई एल्टीट्यूड मैराथन कराने की तैयारी की जा रही है. यह पहला मौका है, जब साहसिक खेलों में राज्य इस तरह का प्रयास कर रहा है. बड़ी बात यह है कि साइकिलिंग के माध्यम से देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के लोगों को भी उत्तराखंड में अल्ट्रा मैराथन में प्रतिभाग करने का मौका मिलेगा और साहसिक खेलों को लेकर एक अच्छा संदेश भी दिया जा सकेगा.

पर्यटकों को उत्तराखंड में लाने के लिए साहसिक खेलों में एक और एक्टिविटी को जोड़ा जा रहा है. अल्ट्रा मैराथन के रूप में साइकिलिंग के माध्यम से देश और दुनिया भर के लोग अब प्रदेश के हाई एल्टीट्यूड को जान सकेंगे. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य में अल्ट्रा मैराथन की शुरुआत होने जा रही है. सबसे पहले अक्टूबर महीने से कुमाऊं में इसका आयोजन होगा.

उत्तराखंड में यह पहला मौका है, जब इस तरह के आयोजन को करवाया जा रहा है. इसके लिए अक्टूबर का महीना चुना गया है, जब गुंजी से आदि कैलाश तक अल्ट्रा मैराथन करवाई जाएगी. इसकी कुल दूरी दोनों तरफ 72 किलोमीटर रखी गई है. ऐसा नहीं है कि हाई एल्टीट्यूड मैराथन को लेकर यह कोई एक अकेला आयोजन तय किया गया हो, बल्कि राज्य सरकार अब रेगुलर बेस पर हर साल इस तरह के कार्यक्रम का शेड्यूल तय करने जा रही है.

हाई एल्टीट्यूड मैराथन जैसा कि नाम से ही लग रहा है, अत्यधिक ऊंचाई पर होने वाला साहसिक खेल है. 2500 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर इसका आयोजन कराया जाता है. खास बात यह है कि हाई एल्टीट्यूड होने के कारण इस क्षेत्र में ऑक्सीजन की कमी प्रतिभागियों के लिए एक बड़ी चुनौती होती है. इन्हीं परिस्थितियों का सामना करते हुए मैराथन को पूरा करना होता है.

भारतीय सेना स्पीति घाटी में भी इसी तरह के आयोजन को करवाती है. उधर लद्दाख के आयोजन को देखें तो यह पूरी दुनिया में सबसे ऊंची हाई एल्टीट्यूड मैराथन के रूप में मानी जाती है. अब उत्तराखंड भी प्रदेश में हाई एल्टीट्यूड क्षेत्र को मैराथन के रूप में अंतरराष्ट्रीय नक्शे पर लाने का प्रयास में है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले पर अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस तरह के आयोजन का वार्षिक पर्यटन कैलेंडर में भी शामिल किया जाए और इसका नियमित आयोजन सुनिश्चित किया जाए.

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