उत्तराखंड

दून में बढ़ रहा डेंगू का खतरा, 55 स्थानों पर मिला डेंगू का लार्वा, जानें कैसे करें बचाव

उत्तराखंड: बरसात के आते ही देहरादून में डेंगू का खतरा भी बढ़ने लगा है. बीते रोज देहरादून में 55 जगह डेंगू का लार्वा मिला है. जिसे आशा कार्यकर्ताओं द्वारा नष्ट किया गया. हालांकि की अभी तक देहरादून में डेंगू का केस सामने नही आया है। लेकिन शहरभर के 100 वार्डों में नगर निगम व स्वास्थ्य की टीम अभियान चला रही है.

डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए मंगलवार को देहरादून के 12,236 घरों में सर्चिंग अभियान चलाया गया. इस दौरान 31,521 कंटेनरों में लार्वा की तलाश की गई। 55 कंटेनरों में डेंगू का लारवा मिला जिसको नष्ट कर दिया गया है. बता दें कि अभी तक 71,437 घरों और 203685 कंटेनरों में डेंगू का लार्वा ढूंढा गया है। जिनमें से 285 में लार्वा मिलने पर नष्ट कर दिया गया है.

नगर निगम देहरादून द्वारा लगातार डेंगू का लार्वा नष्ट कराया जा रहा है. अपर नगर आयुक्त नगर निगम देहरादून बीर सिंह बुडियाल ने बताया कि हमारी आशा कार्यकर्ताएं नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार 100 वार्डों में लगी हुई है। टीम हर वार्ड में जाकर लार्वा को नष्ट कर रही है और लोगों को जागरुक भी कर रही है.

उन्होंने बताया कि जहां भी लार्वा मिल रहा है कीटनाशक और छिड़काव के जरिए से नष्ट कराया जा रहा है. अपर नगर आयुक्त बीर सिंह बुडियाल ने बताया की पिछली बार जिन क्षेत्रों में ज्यादा डेंगू पनपा था उन पर विशेष फोकस किया जा रहा है.

वर्षा ऋतु के दौरान जल जनित बीमारी आदि के साथ डेंगू और चिकनगुनिया के फैलने की संभावना के दृष्टिगत दून अस्पताल ने नागरिकों से सावधानी बरतने की सलाह दी है. तेज बुखार, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और सिर में तेज दर्द, मसूड़े व नाक से खून बहना और शरीर पर लाल चकत्ते होना डेंगू के लक्षण हो सकते हैं। तेज बुखार, सिर दर्द, जोड़ों में सामान्य दर्द और शरीर पर लाल चकत्ते आना आदि चिकनगुनिया के प्रमुख लक्षण हैं.

दून अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि डेंगू एवं चिकनगुनिया का वाहक एंडीज मच्छर रुके हुए साफ पानी में होता है और दिन के समय काटता है पूरी बाह के कपड़े पहने तथा पानी को जमा न होने दें इससे बचने के लिए घरों के आसपास सफाई रखें सभी कंटेनर जिनमें पानी भरा हो एवं कूलर के पानी सप्ताह में एक बार खाली कर सुखाकर उनमें नया पानी भरें दिन में भी सोते समय मच्छरदानी का उपयोग कर सकते हैं.

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