उत्तराखंड

राज्यपाल ने किया मुख्यमंत्री के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित पुस्तकों का विमोचन

उत्तराखंड: पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काफी विरोध हो रहा है, जिसको लेकर कांग्रेस के पूर्व नेता और कल्किधाम पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम महाराज ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने एसआईआर का विरोध कर रहे विपक्षी दलों पर बड़ा आरोप लगाया है.

दरअसल, प्रमोद कृष्णम देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे. सीएम धामी के सार्वजनिक जीवन पर लिखी गई पुस्तक का विमोचन समारोह था. इस दौरान प्रमोद कृष्णम ने कहा कि कुछ लोग पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश बनाना चाहते हैं, इसलिए वो एसआईआर का विरोध कर रहे हैं. प्रमोद कृष्णम ने कहा कि एसआईआर का विषय भारत की एकता के लिए जरूरी है. भारत में पैदा होने वाला और भारत में रहने वाले प्रत्येक नागरिक भारतीय है. उसकी पूजा-पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन है वो भारतीय ही.

प्रमोद कृष्णम का कहना है कि जब भी भारत को जोड़ने के लिए कोई भी कानून जैसे सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम), यूसीसी (समान नागरिक संहिता) या फिर एसआईआर.

आता है तो, इनका विरोध शुरू हो जाता है. इन कानूनों से भारत में रहने वाले भारत के किसी भी नागरिक को कोई नुकसान नहीं है. फिर भी भारत का विपक्ष वो ही काम कर रहा है, जो मोहम्मद अली जिन्ना ने किया था.

आरोप लगाते हुए प्रमोद कृष्णम ने कहा कि विपक्ष क्षेत्र, धर्म, जाति और भाषा के नाम पर इस देश को खंड-खंड करना चाहता है. उत्तराखंड में भी इसी तरह के साजिश हो रही है, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि सीएम धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सुरक्षित, संरक्षित और सशक्त रहेगा.

वहीं, उत्तराखंड में डेमोग्राफिक चेंज को लेकर इस वक्त उत्तराखंड में जो हल्ला मचा हुआ है, उस पर भी प्रमोद कृष्णम से सवाल किया गया. डेमोग्राफिक चेंज के सवाल पर प्रमोद कृष्णम ने सिर्फ इतना ही कहा कि डेमोग्राफिक चेंज एक नेचुरल प्रोसेस नहीं है, बल्कि एक प्लानिंग के तहत हो रहा है, जिसके खिलाफ पूरे भारत को एक होना है.

इस कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती भी मौजूद थे. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जो कुछ घटनाएं घटी हैं, इसका अर्थ यह है कि साजिश गहरी है. ऐसे में इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए. साथ ही कहा कि जब गहराई से जांच होती है तो वो देश के संविधान के और कानून के अनुसार होती है. जब कोई जांच कानून के अनुसार होती है तो उसमें किसी को बुरा मानने की आवश्यकता नहीं होती है. लिहाजा, सच है तो डरने की जरूरत नहीं है.

बता दें कि, प्रमोद कृष्णम और स्वामी चिदानंद सरस्वती ने ये बयान देहरादून में दिए. देहरादून में दोनों संत एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे.

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