उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को फूलदेई के त्योहार की दी हार्दिक बधाई व शुभकामनायें

उत्तराखंड: मुख्यमंत्री आवास में धूमधाम से मनाया गया लोकपर्व फूल देई मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को फूलदेई के त्योहार की दी हार्दिक बधाई व शुभकामनायें. उत्तराखंड का लोकपर्व फूलदेई मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री ने सपरिवार धूमधाम से मनाया गया.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में मुख्यमंत्री आवास में रंग बिरंगे परिधानों में सजे बच्चों ने देहरी में फूल व चावल बिखेरकर पारंपरिक गीत ‘फूल देई छमा देई, जतुक देला, उतुक सई, फूल देई छमा देई, देड़ी द्वार भरी भकार’ गाते हुए त्योहार की शुरुआत की. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी बच्चों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को फूल देई के त्योहार की हार्दिक बधाई व शुभकामनायें देते हुए देश व प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की. उन्होंने कहा कि लोकपर्वों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है.

उत्तराखंड में ऋतुओं के अनुसार त्योहार मनाए जाते हैं. जो यहां की संस्कृति को उजागर करते हैं साथ ही पहाड़ की परंपराओं को भी कायम रखे हुए हैं. वहीं राज्य के फसल उत्सव के रूप में हिंदू महीने चैत्र के पहले दिन मनाया जाने वाला फूलदेई लोकपर्व की शुरुवात 14 मार्च से हो जाती है. फूलदेई लोकपर्व एक महीने तक चलता है. फूलदेई लोकपर्व उत्तराखंड राज्य में वसंत ऋतु का स्वागत करता है. पर्व को लेकर बच्चों में खासा उत्साह रहता है जिस कारण फूलदेई को लोक बालपर्व भी कहा जाता है.

फूलदेई के दिन सुबह सवेरे छोटे बच्चे रंग बिरंगे परिधानों में सजे बच्चों ने देहरी पर फूल व चावल बिखेरकर पारंपरिक गीत ‘फूल देई छमा देई, जतुक देला, उतुक सई, फूल देई छमा देई, देड़ी द्वार भरी भकार’ गाते हुए त्योहार की शुरुआत करते है. इस पारंपरिक गीत का मतलब है कि देहली फूलों से भरपूर और मंगलकारी हो. सबके घरों में अन्न का पूर्ण भंडार हो.

बच्चे फ्योंली, बुरांस और दूसरे स्थानीय रंग बिरंगे फूलों को चुनकर लाते हैं और उनसे सजी फूलकंडी लेकर घोघा माता की डोली के साथ घर-घर जाकर फूल डालते हैं. घोघा माता को फूलों की देवी माना जाता है. फूलों के इस देवी की पूजा बच्चे ही करते हैं. यह पर्व प्रकृति से जुड़ा हुआ है. यह त्योहार फुलारी, फूल सक्रांति के नाम से भी जाना जाता हैं. इन दिनों पहाड़ों में जंगली फूलों की भी बहार रहती है. चारों ओर छाई हरियाली और कई प्रकार के खिले फूल प्रकृति की खूबसूरती में चार-चांद लगाते हैं.

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