उत्तर प्रदेश

काशी में देवलोक के देवताओं ने मनाई दीपावली, सीएम योगी हुए देव दीपावली में शामिल

उत्तर प्रदेश: देव दीपावली के पावन पर्व पर बुधवार शाम काशी के अर्धचंद्राकार गंगा घाटों पर जब शाश्वत ज्योति की लौ प्रज्वलित हुई तो पूरा शहर दिव्यता और भव्यता के अद्भुत संगम में डूब गया. मां गंगा की गोद से निकलती आस्था की सीढ़ियों पर जलते लाखों दीपों की रोशनी ने ऐसा दृश्य प्रस्तुत किया, मानो स्वर्ग स्वयं धरती पर उतर आया हो. गोधूलि बेला में उत्तरवाहिनी गंगा की लहरों पर जब दीपों की सुनहरी आभा झिलमिलाई तो काशी की आत्मा एक बार फिर सनातन संस्कृति की उजास से आलोकित हो उठी.

देव दीपावली का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमो घाट पर पहला दीप जलाकर किया. उनके साथ पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, राज्य मंत्री रविन्द्र जायसवाल, विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, महापौर अशोक तिवारी ने भी दीप जलाकर मां गंगा को नमन किया. इसके बाद सभी विशिष्ट अतिथियों ने क्रूज पर सवार होकर मां गंगा की आरती के साथ घाटों पर सजी देव दीपावली के अद्भुत नजारे का अवलोकन किया. CM योगी को अपने बीच देखकर जनता ने हर-हर महादेव का जयघोष भी किया. मुख्यमंत्री ने हाथ हिलाकर काशी की जनता और पर्यटकों का अभिवादन किया.

राष्ट्रीयता का संदेश देते हुए दशाश्वमेध घाट पर ‘अमर जवान ज्योति’ की अनुकृति स्थापित की गई थी, जहां कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. देव दीपावली महोत्सव को ऑपरेशन सिंदूर के नाम समर्पित किया गया, जिसमें देश की वीर माताओं के आंचल को नमन किया गया.

योगी सरकार के द्वारा इस बार 10 लाख दीपों का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जनसहभागिता से यह संख्या बढ़कर 15 से 25 लाख दीपों तक पहुंच गई. इन दीपों में 1 लाख गाय के गोबर से निर्मित पर्यावरण अनुकूल दीप भी शामिल थे. घाटों, तालाबों, कुंडों और देवालयों पर दीपों की शृंखला ने काशी को सुनहरी माला की तरह सजा दिया.

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परंपरा के साथ आधुनिकता का संगम चेत सिंह घाट पर दिखा, जहां 25 मिनट का थ्रीडी प्रोजेक्शन मैपिंग शो ‘काशी-कथा’ प्रस्तुत किया गया. इसमें भगवान शिव-पार्वती विवाह, भगवान विष्णु की चक्र पुष्करिणी, भगवान बुद्ध के उपदेश, कबीर-दास और तुलसीदास की भक्ति परंपरा तथा महामना मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित काशी हिंदू विश्वविद्यालय तक की यात्रा का दृश्य जीवंत किया गया.

दशाश्वमेध घाट की महाआरती में 21 अर्चक और 42 देव कन्याओं ने रिद्धि-सिद्धि के रूप में आरती की. 21 कुंटल फूलों और 51 हजार दीपों से सजे घाट पर जब शंखनाद और घंटा-घड़ियालों की ध्वनि गूंजी तो वातावरण में अद्भुत ऊर्जा का संचार हो गया. इस अवसर पर अमर वीर योद्धाओं को ‘भगीरथ शौर्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया.

देव दीपावली पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना हुई. बाबा के दरबार को फूलों और रोशनी से भव्य रूप में सजाया गया. धाम का पूरा परिसर दीपों की उजास से जगमगा उठा, जहां श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा रहा.

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श्रद्धालुओं की भीड़ और वीवीआईपी उपस्थिति को देखते हुए वाराणसी को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया. बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध रहा. घाटों पर एनडीआरएफ और जल पुलिस की टीमें बोट्स, आधुनिक उपकरणों और वाटर एम्बुलेंस के साथ तैनात रहीं. नदी मार्ग पर नावों के लिए लेन निर्धारण किया गया.

नाविकों को निर्धारित दिशा और सुरक्षा नियमों के पालन के निर्देश दिए गए. सड़कों पर यातायात, पार्किंग और प्रवेश-निकास की व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित रही. महिलाओं की सुरक्षा के लिए सादी वर्दी में महिला पुलिसकर्मियों, एंटी रोमियो स्क्वॉड और क्यूआरटी टीमों को तैनात किया गया.

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