गाजियाबाद: लिफ्ट गिरने की लगातार घटनाएं सामने आ रही हैं. लिफ्ट हादसों में कई लोग घायल भी हो चुके हैं. ज़िले में बहुमंजिला इमारतों में बिना पंजीकरण के सैकड़ों लिफ्ट्स का संचालन हो रहा है. जो कि वहां रहने वाले या फिर काम करने वाले लोगों की जिंदगी के साथ साफ तौर पर खिलवाड़ है.
गाजियाबाद की विद्युत सुरक्षा विभाग से मिले आंकड़े बेहद चिंताजनक है. जिले में तकरीबन चार हजार लिफ्ट्स संचालित हो रही हैं. प्रदेश में लिफ्ट एवं एस्केलेटर अधिनियम को लागू हुए एक साल से अधिक हो चुका है. इसके बावजूद भी गाजियाबाद में तकरीबन एक हज़ार लिफ्ट बिना पंजीकरण के संचालित हो रही हैं.
- विद्युत सुरक्षा विभाग के सहायक निदेशक सौरभ कुमार सिंह के मुताबिक, 12 दिसंबर 2025 तक गाजियाबाद में 2991 लिफ्ट्स का पंजीकरण हुआ है.
- विभाग का एस्टीमेट है कि गाजियाबाद में तकरीबन चार लिफ्ट्स संचालित हो रही है.
- विभाग द्वारा अस्पताल, शिक्षण संस्थान, हाई राइज रेजिडेंशियल सोसाइटी, शॉपिंग मॉल समेत विभिन्न बहुमंजिला में लगी हुई लिफ्ट्स का रजिस्ट्रेशन करने के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं.
- नोटिस भेज कर संचालकों को बताया जा रहा है कि समय से लिफ्ट का रजिस्ट्रेशन पूर्ण कारण नहीं तो शासन के निर्देश अनुसार पेनल्टी लगाई जाएगी.
गाजियाबाद में लिफ्ट गिरने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. बुधवार 10 दिसंबर 2025 को गाजियाबाद की मोटर स्थित संचार रेजिडेंसी के टावर सी की लिफ्ट टूटकर अचानक से ग्राउंड फ्लोर पर आगरी. हादसे के वक्त निवासी अमित कुमार लिफ्ट में मौजूद थे. लिफ्ट गिरने से अमित घायल हो गए इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा. कुछ देर बाद ही रेजिडेंसी के बी टावर की लिफ्ट भी अचानक फंस गई. सुरक्षा गार्ड द्वारा लिफ्ट में फंसी 12 वर्षीय छात्रा समेत अन्य लोगों को काफी मशक्कत के बाद लिफ्ट से बाहर निकल गया. मामले को लेकर समिति निवासियों ने जिला प्रशासन से शिकायत की है. प्रशासन द्वारा मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई है.

करीब हफ्ते भर पहले गाजियाबाद की विजयनगर थाना क्षेत्र स्थित कुणाल रेजीडेंसी में एक ही दिन में दो बार लिफ्ट गिरने की शिकायत मिली. लिफ्ट करने से कुल चार लोग घायल हो गए. समिति के निवासियों ने मामले की शिकायत जिला प्रशासन और पुलिस से की थी. फिलहाल मामले में जांच जारी है. जिले में केवल लिफ्ट गिरने ही नहीं बल्कि लिफ्ट के फंस जाने की भी लगातार शिकायत आए दिन सामने आती रहती हैं. साहिबाबाद की गुलमोहर एनक्लेव सोसायटी में बुजुर्ग पति-पत्नी करीब 20 मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहे थे.
समाजसेवी राजनगर एक्सटेंशन निवासी दीपांशु मित्तल का कहना है, सोसाइटी में लगी लिफ्ट में लगातार हो रहे हादसों को देखकर अब डर लगता है. घर के बच्चों और बुजुर्गों को लिफ्ट में अकेले नहीं जाने देते हैं. सोसाइटी में रहने वाले लोग हर महीने हजारों रुपए मेंटेनेंस देते हैं लेकिन इसके बावजूद भी मूलभूत सुविधाओं का दुरुस्त न होना चिंता की बात है. सोसाइटी में लिफ्ट्स की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को गंभीर होना चाहिए. सोसाइटी में हजारों लोग रहते हैं. लिफ्ट की सुरक्षा को लेकर लापरवाही हजारों लोगों की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ है.
लिफ्ट पंजीकरण न कराने पर जुर्माना
• 7 दिन तक: ₹200 प्रतिदिन
• 7 से 15 दिन: ₹500 प्रतिदिन
• 15 से 30 दिन ₹1000 प्रतिदिन
• 30 दिन के बाद: लिफ्ट का संचालन बंद और दस हजार रुपए जुर्माना
लिफ्ट संचालन के मानक
• लिफ्ट में सीसीटीवी कैमरे के साथ ऑटोमेटिक रेस्क्यू डिवाइस सिस्टम (ARD System) इंस्टाल होना चाहिए.
• लिफ्ट में लगा इमरजेंसी अलार्म सिक्योरिटी रूम से जुदा होना चाहिए
• लिफ्ट में इमरजैंसी कॉन्टैक्ट नंबर्स और इंटरकॉम की सुविधा होनी चाहिए.
• समय-समय पर लिफ्ट की सुरक्षा जांच और सुरक्षा जांच से संबंधित रिकॉर्ड मेंटेन होने चाहिए.
• लिफ्ट के पास गार्ड मौजूद होना चाहिए, ताकि किसी व्यक्ति के लिफ्ट में फंसने की स्थिति में तुरंत बाहर निकाला जा सके.

