उत्तर प्रदेश

CJI डीवाई चंद्रचूड़ आज से दो दिवसीय दौरे पर पहुंचेंगे वाराणसी, सीएम योगी ने किया स्वागत

उत्तर प्रदेश: सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में इंग्लिश भाषा में होने वाले बहस को आम जनता नहीं समझ सकती. यह ठीक उसी तरह है, जैसे इंग्लिश में माँ के प्यार को ट्रांसलेट नहीं कर सकती. इंग्लिश में दो किसानों के बीच हुई बातचीत को सही तरीके से नहीं समझा जा सकता है. इसीलिए स्थानीय भाषा में ताल और तलैया का मतलब यहीं आकर मुझे पता चला. यह बात देश के मुख्य न्यायाधीश डॉक्टर डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को लखनऊ के डॉक्टर राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में संबोधित करते हुए कही.

सीजेआई ने कहा कि ‘उत्तर प्रदेश एक ऐसा विधि विविधता वाला प्रदेश है, जहां हर क्षेत्र की भाषा और बोली अलग है. यहां जज और वकील कोर्ट में अंग्रेजी में बहस करते हैं तो उसे भोजपुरी बोलने वाला आम आदमी कैसे समझ सकता है. उत्तर प्रदेश के वकील हिंदी में बेहतरीन तरीके से अपना पक्ष रखते हैं, इसलिए सभी विश्वविद्यालय में पढ़ाई हिंदी सहित अन्य भाषा में भी होनी चाहिए. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि कानून की शिक्षा से अंग्रेजी को पूरी तरह से हटा देना चाहिए, बल्कि इसे स्थानीय भाषा और हिंदी में भी पढ़ाया जाना चाहिए.

चीफ जस्टिस ने कहा कि लोहिया लॉ यूनिवर्सिटी को अपने यहां लॉ की पढ़ाई हिंदी विषय में जरूर करनी चाहिए. अगर यहां का छात्र खसरा और खतौनी के बारे में भेद नहीं कर सकेगा, तो वह उत्तर प्रदेश की आम जनता की भी मदद पूरी तरह से नहीं कर पाएगा. उन्होंने कहा कि बम्बई हाई कोर्ट से जब मैं इलाहाबाद हाईकोर्ट आया तब मुझे पता चला कि यहां के वकील बेहतरीन तरीके से हिंदी में अपना पक्ष रख लेते हैं. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्याय प्रक्रिया को आम लोगों के लिए आसान बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक पहल की शुरुआत की है. सुप्रीम कोर्ट ने 1950 से लेकर अब तक अपने 37000 जजमेंट को हिंदी में अनुवाद कर चुका है. उन्होंने भावी वकीलों से आग्रह किया कि वह इसका प्रयोग करें और आम लोगों को मदद दिलाने में उनकी मदद करें.

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ का स्वागत करते हुए कहा कि भारत के अंदर विधि का शासन हो, अच्छे विधि विशेषज्ञ स्नातक, परास्नातक और शोध की डिग्री लेने के बाद जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में राष्ट्र निर्माण के अभियान का हिस्सा बन सके. इसके प्रति यहां के छात्र के अंत:कारण की जिजीविषा के कारण ही विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह में भी मुख्य अतिथि के रूप में भारत के मुख्य न्यायाधीश डॉक्टर डीवाई चंद्रचूड़ का आशीर्वाद उन्हें मिल रहा है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *