गाजियाबाद: जहां एक तरफ दुनियाभर में पर्यावरण को लेकर समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, वहीं ऐसे भी कुछ लोग मौजूद हैं जो इस उम्मीद की मशाल जलाए हुए हैं. गाजियाबाद की साक्षी झा इसी फेहरिस्त में एक नाम हैं, जिन्हें बीते 12 जनवरी यानी युवा दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य स्तरीय विवेकानंद यूथ अवार्ड से सम्मानित किया है. उनकी इस उपलब्धि के बाद परिवार फूला नहीं समा रहा है और घर पर बधाई देने आने वालों का तांता लगा हुआ है.
इसे लेकर साक्षी ने कहा, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मैं हृदय से आभार प्रकट करती हूं. उनके हाथों यह अवार्ड प्राप्त करना मेरे लिए गर्व की बात है. जब मुझे मंच पर बुलाया गया, तो मुझे मेरी मेहनत, संघर्ष और वह सभी लोग याद आ गए जिन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया. मैं इस सम्मान को केवल अपना नहीं मानती, बल्कि अपने माता-पिता, परिवार और उन सभी मार्गदर्शकों को समर्पित करती हूं, जिन्होंने मुझ पर अटूट विश्वास किया. कई बार चुनौतियां सामने थी लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी. मुझे बचपन से ही सिखाया गया है कि ईमानदारी, अनुशासन और निरंतर प्रयास करने से लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मार्गदर्शन और उनके प्रेरणादायक शब्द मेरे लिए ऊर्जा का स्रोत हैं. प्रदेश की योगी सरकार लगातार युवाओं को आगे बढ़ाने में हर संभव मदद प्रदान कर रही है. प्रदेश सरकार की मदद से ही आज यहां तक पहुंचाने का मौका मिला है.”

साक्षी झा साल 2018 से पर्यावरण संरक्षण को लेकर काम कर रही हैं. उन्होंने वेस्ट मैटेरियल से कई ऐसे प्रोजेक्ट तैयार किए हैं, जिन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहा गया है. शुरुआत में वह प्लास्टिक वेस्ट को रिसाइकल कराया करती थीं, लेकिन बाद में उन्हें इसे अपसाइकिल करने का फैसला लिया. उनका मानना है कि प्लास्टिक वेस्ट को अपसाइकिल कर पर्यावरण को प्लास्टिक से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है. फिलहाल वह उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं.
नोएडा प्राधिकरण द्वारा महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर 1650 किलोग्राम प्लास्टिक वेस्ट का चरखा बनवाया गया था. जिसे नोएडा के सेक्टर 94 में लगाया गया. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने चरखे का उद्घाटन किया था. उन दिनों प्लास्टिक वेस्ट से तैयार किए गए चरखे की चर्चा नोएडा से लंदन तक हुई थी. चरखा बनाने का काम साक्षी झा को सौंपा गया था, जिन्होंने तकरीबन तीन हफ्ते में एक्रेलिक के जरिए चरखा तैयार किया था. उनके इस प्रोजेक्ट की खूब सराहना की गई थी.
साक्षी बताती हैं, “हमने साल 2018 में प्लास्टिक वेस्ट के अपसाइक्लिंग की दिशा में अपने कार्य की शुरुआत की थी. शुरुआती दौर में हमें तकनीकी, संसाधनों की कमी, प्लास्टिक वेस्ट की कम उपलब्धता समेत कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा. सीमित संसाधनों और अनुभव के बावजूद हमने तमाम पड़ावों को पार कर अपने काम को जारी रखा. साल 2018 से अब तक हम तकरीबन 150 टन प्लास्टिक वेस्ट की सफलतापूर्वक अपसाइक्लिंग कर चुके हैं. वर्तमान में हमारे कार्य का दायरा पहले की तुलना में काफी विस्तार हुआ है. साल 2026 से हमने लक्ष्य रखा है कि प्रतिवर्ष 1000 टन प्लास्टिक वेस्ट की अपसाइक्लिंग करनी है.”

