महाराष्ट्र: नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) प्रमुख शरद पवार ने शुक्रवार को साबित कर दिया कि वे जनता के नेता क्यों हैं. दरअसल, उन्होंने भारी बारिश के बीच सतारा में एक रैली को संबोधित किया. इतना ही नहीं इस दौरान पार्टी सुप्रीमो ने छाता इस्तेमाल करने से भी इनकार कर दिया, क्योंकि उन्हें सुनने के लिए इकट्ठा हुए लोग भी बिना सिर पर छाया के बारिश में बैठे थे.
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अब तक 79 साल के पवार ने जोरदार चुनाव प्रचार किया है. लह महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में हर दिन कम से कम तीन से चार रैलियों को संबोधित कर रहे हैं. पार्टी सूत्रों के अनुसार विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा के बाद पवार ने करीब 50 सभाओं को संबोधित किया है.
इस बीच सीनियर पवार देर शाम सतारा पहुंचे, जहां उदयनराजे भोसले के इस्तीफे के कारण लोकसभा उपचुनाव हो रहा है. जब पवार रैली को संबोधित करने के लिए मंच पर खड़े हुए, तभी वहां भारी बारिश शुरू हो गई. हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री ने भारी बारिश के बावजूद करीब 10 मिनट तक अपना भाषण जारी रखा.
#WATCH | NCP-SCP chief Sharad Pawar delivered his speech in the rain, in Ichalkaranji, earlier today
(Source: Social Media page of Sharad Pawar)#MaharahstraElection2024 pic.twitter.com/pZZRypRReR
— ANI (@ANI) November 15, 2024
सतारा रैली में पवार का भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और जयंत पाटिल, सुप्रिया सुले, जितेंद्र अव्हाड़ और दिलीप वाल्से-पाटिल जैसे कई प्रमुख एनसीपी नेताओं ने उनकी प्रशंसा की. कई एनसीपी कार्यकर्ताओं ने भी वीडियो पोस्ट करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया. एनसीपी नेताओं का माननाहै कि मतदान से ठीक दो दिन पहले सतारा रैली ने पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया है.
रैली के दौरान पवार ने छत्रपति शिवाजी के 13वें वंशज भोसले पर भी कटाक्ष किया, जिन्होंने एनसीपी छोड़ दी, लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और उपचुनाव लड़ रहे हैं. पवार ने कहा कि बारिश के जरिए भगवान ने हमें आशीर्वाद दिया है और मतदाताओं से 2019 के लोकसभा चुनावों में गलत उम्मीदवार को मैदान में उतारने की अपनी गलती को सुधारने की अपील की.
उन्होंने कहा, “पहले भी कई बार ऐसा हुआ है कि जब मैं किसी सभा में बोलना शुरू करता हूं तो बारिश शुरू हो जाती है और ऐसे समय (जब मेरे भाषण के दौरान बारिश हुई है) चुनाव के नतीजे अच्छे रहे हैं. इस बार भी आप सभी को तय करना है कि महाराष्ट्र की सरकार किसके हाथों में दी जाएगी.
