महाराष्ट्र: सरकार द्वारा स्कूलों में कक्षा 1 से 4 तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने के फैसले के बाद राज्य में विरोध की लहर तेज हो गई है. यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप लिया गया था, लेकिन इसके खिलाफ साहित्यकार, भाषा विशेषज्ञ, राजनीतिक नेता और आम जनता में असंतोष बढ़ा है. विरोध की आवाजों को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सोमवार रात को अपने वर्षा निवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई.
इस बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे, राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर, शिक्षा विभाग के अधिकारी और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए. बैठक के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि त्रिभाषा नीति के फॉर्मूले को अंतिम रूप देने से पहले मराठी भाषा के विद्वानों, लेखकों, भाषा विशेषज्ञों, राजनीतिक नेताओं सहित सभी संबंधित पक्षों से व्यापक संवाद किया जाएगा.
सीएम ने यह भी कहा कि देश के अन्य राज्यों में त्रिभाषा नीति कैसे लागू की गई है, इसकी जानकारी भी जनता के सामने रखी जाएगी ताकि सभी को पूरा संदर्भ समझ में आए. इस प्रक्रिया में अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा और सभी के सुझावों के आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
महाराष्ट्र सरकार ने 16 अप्रैल 2025 को हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने का निर्णय लिया था. लेकिन इस फैसले के खिलाफ व्यापक विरोध हुआ. विरोध में कहा गया कि हिंदी को जबरदस्ती पढ़ाना मराठी भाषा और संस्कृति के लिए खतरा है. साथ ही कुछ ने इसे भाषा के अधिकारों का उल्लंघन भी बताया.
विरोध के कारण सरकार ने अब अपनी नीति पर पुनर्विचार करते हुए सभी पक्षों से विचार-विमर्श का रास्ता अपनाया है. स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का जिम्मा संभाला है. वे शीघ्र ही विद्वानों, भाषा विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से बातचीत करेंगे.
बैठक में मुख्यमंत्री के सचिव श्रीकर परदेशी, अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता, प्रमुख सचिव नवीन सोना, शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव रणजीत सिंह देओल, शिक्षा आयुक्त सचिंद्र प्रताप सिंह और महाराष्ट्र राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के निदेशक राहुल रेखावर भी मौजूद थे.
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि यह प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और व्यापक संवाद के साथ होगी. सभी पक्षों की राय जानने के बाद ही त्रिभाषा नीति के फॉर्मूले पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, जिससे महाराष्ट्र की भाषा संस्कृति सुरक्षित रहे और साथ ही बच्चों की बहुभाषी शिक्षा भी सुनिश्चित हो सके.
