दिल्ली: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों को हवाला देते हुए सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू है और संविधान के अनुच्छेद 67 (A) के अनुसार दिया गया है.
संसद के मानसून सत्र के बीच धनखड़ ने अपने इस्तीफे की घोषणा की. राज्यसभा के सभापति धनखड़ ने सोमवार को संसद का सत्र शुरू होने के बाद कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता की और चुपचाप सदन से चले गए थे.
— Vice-President of India (@VPIndia) July 21, 2025
74 वर्षीय जगदीप धनखड़ ने 11 अगस्त 2022 को भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी और उनका कार्यकाल 2027 तक था. हृदय संबंधी बीमारियों के बाद धनखड़ को इसी साल मार्च में एम्स-दिल्ली में भर्ती कराया गया था और चार दिनों तक उनका इलाज चला था. जहां उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित एक पत्र में जगदीप धनखड़ ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री और संसद सदस्यों के सहयोग के लिए उनके प्रति गहरा आभार व्यक्त किया. धनखड़ ने पत्र में कहा, “स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सा सलाह का पालन करने के लिए, मैं संविधान के अनुच्छेद 67 (A) के तहत, तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूं. मैं भारत की राष्ट्रपति के प्रति उनके अटूट समर्थन और मेरे कार्यकाल के दौरान हमारे बीच बने सुखद एवं अद्भुत कार्य संबंधों के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं.”
धनखड़ ने कहा कि इस प्रतिष्ठित पद को छोड़ते हुए उन्हें भारत के वैश्विक उत्थान और अभूतपूर्व उपलब्धियों पर गर्व है तथा इसके उज्ज्वल भविष्य पर अटूट विश्वास है. उन्होंने आगे कहा, “मैं प्रधानमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं. प्रधानमंत्री जी का सहयोग और समर्थन अमूल्य रहा है और मैंने अपने कार्यकाल के दौरान उनसे बहुत कुछ सीखा है.
राज्यसभा के सभापति के रूप में अपने महत्वपूर्ण कार्यकाल के दौरान धनखड़ का विपक्ष के साथ कई बार टकराव हुआ. विपक्ष ने उन पर महाभियोग चलाने का प्रस्ताव भी पेश किया था. उन्हें हटाने का प्रस्ताव, जो स्वतंत्र भारत में किसी वर्तमान उपराष्ट्रपति को हटाने का पहला प्रयास था. हालांकि, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने खारिज कर दिया था.
जगदीप धनखड़ पद पर रहते हुए इस्तीफा देने वाले दूसरे उपराष्ट्रपति हैं. इससे पहले वीवी गिरि ने 20 जुलाई, 1969 को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए अपने पद से इस्तीफा दिया था.

