सुशील कुमार शर्मा
नई दिल्ली: शनिवार 17 जनवरी का दिन पुस्तक मेले में खास दिन था. मौका था सूरज प्रकाश द्वारा संपादित किताब “मेरे लिखने की मेज” का लोकार्पण. लेखक मंच सजा था वरिष्ठ साहित्यकारों से. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही थीं साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त वरिष्ठ लेखिका मृदुला गर्ग. मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त लेखिका नासिरा जी. विशिष्ट अतिथि थे बिलासपुर से पधारे सतीश जायसवाल और लेखिका जयंती.
मंच के सामने दर्शकों में बैठे थे सौ से भी अधिक दिल्ली के और बाहर से पधारे लेखक गण. इनमें किताब में शामिल लेखक भी थे और अन्य लेखक भी जो कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के लिए मौजूद थे. सूरज प्रकाश स्वास्थ्य ठीक होने के कारण उपस्थित न हो सके और उनकी अनुपस्थिति में उनके संदेश का वीडियो दिखाया गया. संचालन कर रहे थे वरिष्ठ व्यंग्यकार सुभाष चंदर.

अध्यक्ष पद से बोलते हुए मृदुला गर्ग ने कहा कि किताब का नाम “मेरे लिखने की मेज” बिल्कुल सही है. क्योंकि यह किताब मेज के बारे में नहीं लिखने के बारे में है. इस किताब की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि यह बहुत मेहनत से तैयार की किताब है और इसका हिस्सा बनकर उन्हें अच्छा लगा है. उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव सुनाए कि किस तरह रेल की यात्रा में और एक बार घर बदलते समय ट्रक में सामान के ऊपर बैठे हुए उन्होंने कहानी लिखी थी. लिखने के लिए कोई भी जगह मेज हो सकती है और यह जरूरी नहीं कि वह मेज फर्नीचर के रूप में हो.
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए नासिरा जी ने कहा कि उनके लिखने की जगह अस्त व्यस्त ही रहती है. पलंग पर एक तरफ ढेर सारी किताबें और दूसरी तरफ सोने की थोड़ी सी जगह. उनका पूरा घर किताबों से भरा हुआ है और वे कहीं भी बैठकर लिख लेती हैं. उन्हें कभी भी मेज की जरूरत महसूस नहीं हुई. विशिष्ट अतिथि के रूप में बिलासपुर से पधारे सतीश जायसवाल ने लेखन से जुड़ने के अपने अनुभव सुनाए कि किस तरह से उन्होंने लिखना शुरू किया और लेखन ने उन्हें पहचान दिलायी.

कियान फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉक्टर शालिनी अगम ने खुशी जाहिर की कि यह किताब अद्विक प्रकाशन से छपी है और वे अपने फाउंडेशन की ओर से सभी लेखकों को किताब के लिए प्रति सौंपते हुए प्रसन्नता महसूस कर रही है. सुभाष चंदर ने संचालन करते हुए कहा कि सूरज प्रकाश ने स्वास्थ्य ठीक ना होने के बावजूद यह किताब संपादित की है. इस किताब की गूंज बहुत दूर तक जाएगी और उसका लाभ साहित्य से जुड़े सभी व्यक्तियों को मिलेगा.
कार्यक्रम का फेसबुक पर लाइव प्रसारण किया गया जिसे देश भर में फैले लेखकों ने देखा और अपनी राय दी. अंत में अद्वित पब्लिकेशन के संस्थापक अशोक गुप्ता ने सभी का आभार प्रकट किया. उन्होंने मंच में सम्मानित विभूतियों का शाल ओढाकर एवं फूल देकर स्वागत किया.

