सुशील कुमार शर्मा
दिल्ली: प्रतिष्ठित त्रिवेणी कला संगम में शनिवार, 23 मई को आयोजित भरतनाट्यम अरंगेत्रम समारोह में सोलह वर्षीय आद्या ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. बारहवीं कक्षा में अध्ययनरत आद्या ने मंच पर भाव, लय और अभिव्यक्ति का ऐसा सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया कि उपस्थित दर्शक देर तक तालियाँ बजाने को विवश हो गए.
भरतनाट्यम में अरंगेत्रम किसी भी शिष्य की वर्षों की कठिन साधना और प्रशिक्षण के बाद होने वाली पहली औपचारिक एकल मंच प्रस्तुति होती है. इसे नृत्य साधना के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जाता है, जहाँ शिष्य अपने गुरु के मार्गदर्शन में सीखी गई कला का सार्वजनिक प्रदर्शन करता है.

आद्या की माँ सविता किरण ज़ाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज में अंग्रेज़ी की लेक्चरर हैं और पिता राहुल कुमार सिंह आईटी प्रोफेशनल हैं. सांस्कृतिक और शैक्षणिक मूल्यों वाले परिवार में पली-बढ़ी आद्या बचपन से ही प्रतिभाशाली रही हैं. पढ़ाई के साथ-साथ संगीत और शास्त्रीय नृत्य में भी उनकी विशेष रुचि रही है.
आद्या पिछले नौ वर्षों से प्रसिद्ध भरतनाट्यम गुरु भवानी अनंतरमन से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं. गुरु भवानी अनंतरमन के मार्गदर्शन और कठोर साधना ने आद्या की प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. समारोह के दौरान गुरु-शिष्या की सुंदर प्रस्तुति और आपसी सामंजस्य ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया.
इस विशेष अवसर पर प्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना बहनें नलिनी व कमलिनी भी उपस्थित रहीं। उन्होंने आद्या की प्रस्तुति की सराहना करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं.
उपस्थित कला प्रेमियों और अतिथियों का मानना था कि आद्या की प्रतिभा और समर्पण आने वाले समय में निश्चित रूप से देश का नाम रोशन करेगा. खचाखच भरे हुए हाल में वरिष्ठ कला प्रेमी एवं साहित्यकारों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही.