दिल्‍ली-एनसीआर ग्रेटर नोएडा वेस्ट को मिलेगी प्रदेश की पहली डबल डेकर एलिवेटेड रोड, शाहबेरी ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत
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ग्रेटर नोएडा वेस्ट को मिलेगी प्रदेश की पहली डबल डेकर एलिवेटेड रोड, शाहबेरी ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत

ग्रेटर नोएडा: वेस्ट के लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर है। लंबे समय से ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहे शाहबेरी और क्रॉसिंग रिपब्लिक क्षेत्र में अब प्रदेश की पहली डबल डेकर (दो मंजिला) एलिवेटेड रोड बनाने की तैयारी तेज हो गई है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, नोएडा प्राधिकरण और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की संयुक्त परियोजना के तहत इस महत्वाकांक्षी सड़क का निर्माण किया जाएगा.

अधिकारियों के अनुसार, पहले यहां चार लेन की एलिवेटेड रोड बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन मौके पर पर्याप्त चौड़ाई उपलब्ध न होने के कारण डिजाइन में बदलाव किया गया. अब सलाहकार एजेंसी की सिफारिश पर दो मंजिला, तीन-तीन लेन वाली डबल डेकर एलिवेटेड रोड बनाने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में एनएचएआई अधिकारियों द्वारा प्रस्तुतीकरण भी दिया जा चुका है.

यह परियोजना ग्रेटर नोएडा वेस्ट की 130 मीटर चौड़ी सड़क से शाहबेरी और क्रॉसिंग रिपब्लिक होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-9 (एनएच-9) तक लगभग 2.5 किलोमीटर लंबी होगी. योजना के अनुसार पहली मंजिल से ग्रेटर नोएडा से गाजियाबाद की ओर जाने वाला यातायात संचालित होगा, जबकि दूसरी मंजिल से गाजियाबाद से ग्रेटर नोएडा की ओर आने वाले वाहन गुजरेंगे। नीचे की मौजूदा सड़क स्थानीय निवासियों और आसपास के यातायात के लिए पहले की तरह खुली रहेगी.

परियोजना विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक प्रभात शंकर ने बताया कि एलिवेटेड रोड की प्रत्येक मंजिल की चौड़ाई लगभग 9 से 10 मीटर होगी, जिससे तीन लेन का सुगम आवागमन संभव होगा. इससे रोजाना हजारों वाहन बिना किसी बाधा के आवागमन कर सकेंगे और शाहबेरी क्षेत्र में लगने वाले लंबे जाम से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है.

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक (परियोजना) ए.के. सिंह के अनुसार, सामान्य चार लेन की एलिवेटेड रोड के लिए लगभग 15 मीटर चौड़ाई की आवश्यकता होती है, जबकि शाहबेरी क्षेत्र में अधिकतम 14 मीटर जगह ही उपलब्ध है. इसी कारण नई डिजाइन तैयार की गई है. डबल डेकर मॉडल में मात्र 12 मीटर चौड़ाई के भीतर कुल छह लेन विकसित की जा सकेंगी. परियोजना में आधुनिक यू-शेप पीयर तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे कम स्थान में मजबूत और सुरक्षित संरचना तैयार की जा सकेगी.

डिजाइन में बदलाव के साथ ही परियोजना की लागत भी बढ़ गई है. पहले इस एलिवेटेड रोड पर लगभग 400 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था, लेकिन अब डबल डेकर डिजाइन अपनाने के बाद इसकी अनुमानित लागत बढ़कर करीब 900 करोड़ रुपये हो गई है.

यदि यह परियोजना निर्धारित समय पर पूरी होती है तो ग्रेटर नोएडा वेस्ट, शाहबेरी, क्रॉसिंग रिपब्लिक, गाजियाबाद और एनएच-9 के बीच यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.

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