दिल्ली: दिनांक 22 दिसंबर 2025 दिन सोमवार वीर बाल दिवस के उपलक्ष में भव्य कार्यक्रम विद्यालय प्रांगण में आयोजित किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन यमुना पार विकास बोर्ड के अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली राष्टीय स्वयंसेवक संघ दिल्ली प्रांत सह बौद्धिक प्रमुख सतीश शर्मा विद्यालय अध्यक्ष नरेश शर्मा विद्यालय प्रमुख दिनेश चंद शर्मा अध्यापक प्रतिनिधि सुनील जैन द्वारा किया गया. तत्पश्चात छोटे-छोटे छात्रों ने कहीं पर्वत झुके भी हैं.
गीत गाकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में अरविंद सिंह लवली (यमुना पार विकास बोर्ड के अध्यक्ष, विधायक गांधीनगर दिल्ली) रहे. विद्यालय के अध्यक्ष नरेश शर्मा , विद्यालय प्रमुख दिनेश चंद्र शर्मा का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में श्रीमान सतीश शर्मा जी (दिल्ली प्रांत सह-बौद्धिक प्रमुख) उपस्थित रहे सर्वप्रथम श्री अरविंद सिंह लवली जी ने अपने व्यक्तव में सभी छात्रों को संबोधित करते हुए बताया वीर बाल दिवस हर साल 26 दिसंबर को मनाया जाता है, यह दिन गुरु गोबिंद सिंह जी के दो छोटे साहिबजादों, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के अविश्वसनीय साहस और सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है. साहिबजादों को जबरन धर्म परिवर्तन न करने के कारण दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया था. यह दिन इतिहास के सबसे कम उम्र के शहीदों के बलिदान को याद करता है. जो भारतीय इतिहास में साहस और निष्ठा का प्रतीक है.

भारत के प्रधान मंत्री ने 9 जनवरी, 2022 को गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर इस दिन को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी. जिन्होंने छोटी उम्र में धर्म और सच्चाई की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी. औरंगजेब के क्रूर शासकों के सामने झुकने से इनकार कर दीवार में चुनवा दिए गए थे और यह दिन युवाओं को बहादुरी, ईमानदारी और दृढ़ता के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है.
तत्पश्चात श्रीमान सतीश शर्मा जी ने इतिहास में वर्णित आज के दिन के विषय में बताया कि आज 22 दिसंबर के दिन स्वामी विवेकानंद जी की गुरुमाता शारदा देवी जी ,गुरु गोविंद सिंह जी ,महान गणितज्ञ रामानुज जी का जन्म दिवस 22 दिसंबर को ही होता है. वीरों के शहीदी का विवरण करते हुए बताया कि खालसा’ शब्द का अर्थ ‘शुद्ध’ होता है, जो यह दर्शाता है कि खालसा पंथ के सदस्य आध्यात्मिक और नैतिक रूप से शुद्ध हैं और देश के प्रति समर्पित हैं. आनंदपुर साहिब किला खाली करते समय, माता गुजरी जी अपने दो छोटे पोतों, ज़ोरावर सिंह और फतेह सिंह के साथ अपने रसोइए गंगू के साथ मोरिंडा चले गए, जबकि गुरु गोबिंद सिंह जी के बड़े बेटे अजीत सिंह और जुझार सिंह अलग हो गए.
गंगू पंडित लालच में आकर माता जी और साहिबजादों को मुगल अधिकारियों गनी खान के हवाले कर दिया. उन्होंने छात्रों को बताया माता गुजरी जी और दोनों साहिबजादों को सरहिंद के ठंडे बुर्ज में कैद कर दिया गया. इस्लाम कबूल न करने के कारण, 26 दिसंबर 1705 को दोनों छोटे साहिबजादों को जिंदा दीवार में चिनवा दिया गया, और यह खबर सुनकर 27 दिसंबर को माता गुजरी जी ने भी प्राण त्याग दिए. साहिबज़ादा जोरावर सिंह (और उनके भाई फ़तेह सिंह और माता गुजरी) का अंतिम संस्कार दीवान टोडरमल, जो सरहिंद के एक धनी व्यापारी और मुगल दरबार से जुड़े थे, ने सोने की 78,000 मोहरें बिछाकर खरीदी गई ज़मीन पर करवाया था, जिसे इतिहास में सबसे महंगी ज़मीन के रूप में जाना जाता है.

तत्पश्चात श्रीमान सुनील जैन जी द्वारा महान गणितज्ञ है रामानुज जी के विषय में बताया गया श्रीनिवास रामानुजन (1887-1920), जिन्होंने गणितीय विश्लेषण, अनंत श्रृंखला, सतत भिन्न, संख्या सिद्धांत और खेल सिद्धांत सहित कई गणितीय क्षेत्रों में अपने विविध योगदानों से बीसवीं सदी के गणित को नया रूप दिया, उन्हें इतिहास के महानतम गणितज्ञों में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त है. रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर, 1887 को तमिलनाडु के इरोड में हुआ था और कम उम्र में ही उनकी गणितीय प्रतिभा सामने आ गई थी, उन्होंने 12 साल की उम्र तक त्रिकोणमिति में महारत हासिल कर ली थी.
उन्होंने अधिकतर खुद से गणित सीखा और अपने जीवनकाल में लगभग 3,884 समीकरण और परिणाम संकलित किए, जिनमें से कई अद्वितीय और अपरंपरागत थे. 1913 में, उन्होंने ब्रिटिश गणितज्ञ गॉडफ्रे एच. हार्डी के साथ पत्राचार शुरू किया, जिसके बाद वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय चले गए और साथ मिलकर काम किया. उन्होंने संख्या सिद्धांत, अनंत श्रेणी और निरंतर भिन्नों में गहन कार्य किया. वे रॉयल सोसाइटी के फेलो चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के सदस्यों में से एक थे और कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज के फेलो बनने वाले पहले भारतीय थे. उनकी जयंती, 22 दिसंबर को भारत में “राष्ट्रीय गणित दिवस” के रूप में मनाया जाता है. 26 अप्रैल, 1920 को मात्र 32 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन उनके कार्य आज भी गणित और विज्ञान में प्रासंगिक हैं. विद्यालय सभागार की साज साज श्रीमती वसु वर्मा तथा कुमारी नेहा गुप्ता जी द्वारा की गई। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन श्रीमती रेणु जोशी जी द्वारा किया गया।

