उत्तर प्रदेश: पीएम नरेंद्र मोदी आज प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में पहुंचे, जहां पर उन्होंने त्रिवेणी संगम में आस्था की पवित्र डुबकी लगाई. इस दौरान पीएम मोदी गेरुआ वस्त्र और गले में रुद्राक्ष की माला पहने एक योगी की तरह दिख रहे थे. पीएम मोदी ने स्नान के समय रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप किया और फिर अपने हाथों की अंजुलि से 5 बार जल अर्पित किया, उसके बाद चारों दिशाओं में परिक्रमा की. इस दौरान पीएम मोदी ने देवी और देवताओं को प्रणाम करके विश्व कल्याण की कामना की. पीएम मोदी का स्नान के बाद 5 बार जल अर्पित करना और परिक्रमा करने का धर्म और अध्यात्म से जुड़ा एक रहस्य है.
महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान ट्रस्ट के ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय बताते हैं कि पीएम मोदी ने स्नान के बाद जो जल अर्पित किया है, उसका अर्थ देवों को जल अर्पित करने से है. शास्त्रों के अनुसार हमारे हाथ में तीन तीर्थ होते हैं, देव तीर्थ, पितृ तीर्थ और ऋषि तीर्थ. जल अर्पित करने से ये तीनों ही प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं. अब यह जल देने के तरीके पर निर्भर करता है कि आपने किसे जल अर्पित किया है.
प्रयागराज महाकुंभ में आज पवित्र संगम में स्नान के बाद पूजा-अर्चना का परम सौभाग्य मिला। मां गंगा का आशीर्वाद पाकर मन को असीम शांति और संतोष मिला है। उनसे समस्त देशवासियों की सुख-समृद्धि, आरोग्य और कल्याण की कामना की। हर-हर गंगे! pic.twitter.com/ggovSSvhbF
— Narendra Modi (@narendramodi) February 5, 2025
देव तीर्थ: जब व्यक्ति अपने अंजुलि में जल भरकर उसे आगे की ओर अर्पित करता है तो वह देवों को जल चढ़ाता है. पीएम मोदी ने स्नान के बाद अंजुलि से आगे की ओर ही जल अर्पित किया है. उन्होंने देवों को जल अर्पित करके भारत के उत्थान की कामना की है.
पीएम मोदी ने स्नान के बाद जल अर्पित किया और उस दौरान दोनों हाथ जोड़कर चारों दिशाओं में एक बार परिक्रमा भी की. ज्योतिषाचार्य पाण्डेय ने बताया कि परिक्रमा करने का अर्थ है कि उन्होंने चारों दिशाओं के देवों की भी पूजा की. चार दिशाओं में पूर्व के देवता वाराह, दक्षिण के देवता पद्मनाभ, पश्चिम के देवता गोविंद और उत्तर की देवी श्री लक्ष्मी हैं. इस प्रकार से पीएम मोदी ने भगवान नारायण के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा की.

