दिल्ली: लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही देशवासियों को ‘परिवारजन’ के संबोधन के साथ मतदान के लिए लिखी चिट्ठी के बाद अब तीसरे चरण के मतदान के ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा सहित एनडीए के सभी उम्मीदवारों के नाम व्यक्तिगत रूप से पत्र लिखकर कांग्रेस के मंसूबों के प्रति मतदाताओं को जागरूक करने तथा चुनाव में विपक्षी गठबंधन को सबक सिखाने की सलाह दी है.
इस क्रम में प्रधानमंत्री ने अपने दूसरे कार्यकाल के अंतिम क्षणों में भाजपा को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनाने के लिए अपने भरोसेमंद राजनीतिक साथी अमित शाह को लिखे पत्र में उनके योगदान को रेखांकित करते हुए विपक्षी दलों पर आक्रामक होने का अनुरोध किया है। इसे लेकर चर्चा जोरों पर है कि आखिर माजरा क्या है.
मालूम हो कि इंटरनेट, गूगल जैसी अनेक डिजिटल सुविधा आने के बाद चिट्ठियों की अनूठी दुनिया के तौर तरीकों में काफी बदलाव आया है, लेकिन इसकी तासीर जस की तस है. जहां तक चुनावी चिटि्ठयों का सवाल है तो इसकी भी फेहरिस्त लंबी है. देश के पहले आम चुनाव में मोरारजी देसाई और डॉ भीमराव अंबेडकर ने मतदाताओं को पत्र लिखकर उनके पक्ष में मतदान करने का अनुरोध किया था. हालांकि तब मुंबई की जनता ने दोनों नेताओं के अनुरोध को ठुकरा दिया था.
आचार्य नरेंद्र देव ने भी चुनाव में सहयोग के लिए अयोध्या की जनता को व्यक्तिगत पत्र लिखा था. लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने 1977 के आम चुनाव में संपूर्ण क्रांति का नारा देते हुए देश की आम जनता के नाम पत्र लिखा था. उस पत्र का व्यापक असर हुआ और उत्तर भारत से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया.
इसलिए अबकी बार 400 पार के नारे के साथ मोदी और अमित शाह की जोड़ी तीसरे कार्यकाल का दावा तो कर रही है, लेकिन एक अनजाने भय के कारण कांग्रेस के प्रति और कड़ा रुख अख्तियार करने के लिए अपने कार्यकर्ताओं को प्रेरित कर रही है.

