नोएडा: नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एनएमआरसी) ने एक्वा लाइन के दो महत्वपूर्ण विस्तार परियोजनाओं के सिविल निर्माण के लिए देश की अग्रणी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का चयन कर लिया है. लगभग 2,970 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए गुरुवार को वित्तीय बोलियां (फाइनेंशियल बिड) खोली गईं, जिसमें 9 कंपनियों ने भाग लिया. प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के बाद L&T सबसे उपयुक्त बोलीदाता के रूप में चुनी गई.
एनएमआरसी के प्रबंध निदेशक कृष्णा करुणेश ने बताया कि दोनों कॉरिडोर का निर्माण एलिवेटेड ट्रैक के रूप में किया जाएगा। निर्माण कार्य L&T द्वारा किया जाएगा, जबकि परियोजना की निगरानी (सुपरविजन) स्वयं एनएमआरसी करेगी. दो बार री-टेंडर की प्रक्रिया के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक महीने के भीतर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा.
लाखों यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ
इस परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और सुविधाजनक हो जाएगी। वर्तमान में दिल्ली से ब्लू लाइन या मजेंटा लाइन के माध्यम से आने वाले यात्रियों को बॉटेनिकल गार्डन से पहले सेक्टर-52 तक जाना पड़ता है. वहां से पैदल या ई-रिक्शा द्वारा सेक्टर-51 एक्वा लाइन स्टेशन पहुंचकर ग्रेटर नोएडा के लिए मेट्रो बदलनी पड़ती है.
नए कॉरिडोर के बनने के बाद यात्रियों को सीधे बॉटेनिकल गार्डन से सेक्टर-142 तक मेट्रो सेवा उपलब्ध होगी, जिससे समय की बचत होगी और इंटरचेंज की परेशानी भी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी. इसके अलावा ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी रेलवे स्टेशन तक मेट्रो पहुंचने से रेल और मेट्रो नेटवर्क के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा.
दो नए कॉरिडोर का होगा निर्माण
पहला कॉरिडोर बॉटेनिकल गार्डन से सेक्टर-142 तक लगभग 12.5 किलोमीटर लंबा होगा, जिसकी अनुमानित लागत 2,254.35 करोड़ रुपये है. इस मार्ग पर बॉटेनिकल गार्डन, सेक्टर-44, नोएडा ऑफिस सेक्टर-94, सेक्टर-97, सेक्टर-105, सेक्टर-108, सेक्टर-93 और पंचशील बालक इंटर कॉलेज सहित कई नए स्टेशन विकसित किए जाएंगे.
वहीं दूसरा कॉरिडोर ग्रेटर नोएडा डिपो से बोड़ाकी रेलवे स्टेशन तक लगभग 2.6 किलोमीटर लंबा होगा। इसकी अनुमानित लागत 416 करोड़ रुपये है. इस मार्ग पर जुनपत और बोड़ाकी रेलवे स्टेशन दो नए स्टेशन बनाए जाएंगे.
क्षेत्र के विकास को मिलेगा बढ़ावा
मेट्रो विस्तार परियोजना से न केवल लाखों दैनिक यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा के उभरते आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्रों को भी नई गति मिलेगी. बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से ट्रैफिक दबाव कम होने, यात्रा समय घटने और क्षेत्र में निवेश एवं विकास की संभावनाओं को भी बल मिलने की उम्मीद है.

