उत्तराखंड: जंगली जानवरों के हमले ने गढ़वाल और कुमाऊं सभी क्षेत्रों में दहशत पैदा की हुई है. लंबे समय से इन हमलों की वजह से कई लोगों की मौत हुई है. जंगली जानवरों के हमलों में कई लोग घायल भी हुये हैं. आलम यह है कि अब स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे भी डर रहे हैं. आये दिन स्कूलों से बच्चों पर जंगली जानवरों के हमलों की खबरें आ रही हैं.
गढ़वाल में सबसे अधिक भालू के हमले देखे जा रहे हैं. 22 दिसंबर को चमोली जिले के एक में छात्र को भालू उठाकर ले गया. यह कोई पहला मामला नहीं है. आंगन में खेल रहे बच्चे, खेत में काम कर रही बुजुर्ग महिला, घर को लौट रहे पुरुषों पर अक्सर जंगली जानवर रोजाना हमले कर रहे हैं. रुद्रप्रयाग जिले में 3 महीने के भीतर 20 लोगों पर भालू हमला कर चुका है. आलम यह है कि अब भालुओं के हमले को देखते हुए वन विभाग स्कूली बच्चों को एस्कॉर्ट कर रहा है.
आज सचिवालय में मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर नियंत्रण हेतु माननीय मुख्यमंत्री श्री @pushkardhami जी की उपस्थिति में वन विभाग की समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई।
हाल ही में मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं का सामने आना अत्यंत चिंता का विषय है। प्रारंभ से ही यह स्पष्ट किया गया है कि… pic.twitter.com/MEcAQNBn9R
— Subodh Uniyal (@SubodhUniyal1) December 11, 2025
इसी तरह से बात अगर चमोली की करें तो यहां भालू एक व्यक्ति को अपना निवाला बन चुका है. कई लोगों को घायल भी कर चुका है. बदरीनाथ वन प्रभाग में भी दो लोगों को भालू जान से मर चुका है. 14 लोग इसके हमले में घायल हुये हैं. भालुओं के हमले की घटना उत्तरकाशी में भी बेहद अधिक है. यहां 15 लोगों पर अब तक भालू हमला कर चुका है. दो लोगों की मौत यहां भालू के हमले से हुई है. पौड़ी जिले में भालू के हमले की 12 घटनाएं सामने आई हैं. यहां हैरानी की बात यह है कि इंसानों के साथ-साथ जानवरों को भी भालू अपना निवाला बन रहा है. एक व्यक्ति की मौत के साथ-साथ 50 जानवरों को भालू अब तक मौत के घाट उतार चुका है.
जिन इलाकों में भालू, गुलदार जैसे जानवरों की आमद देखी जा रही है उन जिलों में जिलाधिकारी के माध्यम से स्कूलों के समय में परिवर्तन किया गया है. यह परिवर्तन बेहद मामूली है. मसलन 9:15 पर खुलने वाले स्कूल अब 10:00 बजे खुल रहे हैं. 3:30 बजे बंद होने वाले स्कूल अब 3:00 बजे बंद हो रहे हैं.
उत्तराखंड वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा वह लगातार जनपदों के वन विभाग के अधिकारियों से बात कर रहे हैं. संवेदनशील इलाकों में बुश कटर और सोलर लाइट लगाने की व्यवस्था की है. इसके साथ ही जिस क्षेत्र में इस तरह के हमले हो रहे हैं वहां की जिम्मेदारी अधिकारियों को लेनी पड़ेगी. हम लगातार इस और भी प्रयास कर रहे हैं कि फूड वेस्ट के निस्तारण के लिए सही से व्यवस्था हो सके. भालू खाने-पीने की गंध की वजह से भी आबादी वाले क्षेत्रों में आ रहे हैंं. इसके साथ ही हमने निर्देश दिए हैं कि स्कूल सरकारी संस्थान आंगनबाड़ी जैसे आसपास के इलाकों में जो झाड़ियां खड़ी हैं उनको भी काटा जाए.
पूर्व राजाजी पार्क के निदेशक सनातन सोनकर इस गंभीर समस्या को लेकर कहते हैं कि यह कोई नया मामला नहीं है. उत्तराखंड में जंगली जानवरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. हमें केयरिंग कैपेसिटी देखनी होगी. उन्होंने कहा जिस तरह से गुलदार और भालू पहाड़ों में हमला कर रहे हैं उसका कोई स्थाई समाधान होता दिखाई नहीं दे रहा है. इनकी संख्या इतनी बढ़ रही है कि अब यह शहर गांव और स्कूलों तक पहुंच रहे हैं. इस दिशा में विभाग को ठोस कदम उठाने होंगे.
उधर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस मामले को लेकर केंद्रीय वन मंत्री से फोन पर बातचीत की है. उन्होंने उत्तराखंड में जंगली जानवरों के हमलों को रोकने के लिए बड़े स्तर पर कोई रणनीति बनानी की बात कही. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चमोली जिले के पोखरी स्कूल में पढ़ने वाले उन बच्चों से बातचीत की है जिन्होंने मुश्किल से भालू से जान बचाई है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके हौसले की तारीफ की है. उन्होंने कहा वह इस मामले की पूरी रिपोर्ट जल्द मंगवा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने स्कूल आंगनबाड़ी और अन्य क्षेत्रों में वन विभाग के कर्मचारियों अधिकारियों को गश्त बढ़ाने के निर्देश दिये हैं.

